उज्जैन नगर निगम की नीलामी पर विवाद: चालू हालत की गाड़ियां कौड़ियों के दाम बेचने की तैयारी
उज्जैन नगर निगम के वर्कशॉप विभाग द्वारा 31 वाहनों को नीलामी के जरिए बेचने की तैयारी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। मूल्यांकन के बाद इन 31 वाहनों की कुल नीलामी कीमत 9 लाख 40 हजार 103 रुपए तय की गई है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

उज्जैन नगर निगम द्वारा अपने पुराने वाहनों को नीलाम करने की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। निगम के वर्कशॉप विभाग ने 31 वाहनों को बेचने की योजना बनाई है, जिसका कुल मूल्यांकन मात्र 9.40 लाख रुपये तय किया गया है। इस निर्णय के सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और इसे निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
चालू हालत की गाड़ियों का कम मूल्यांकन बना विवाद की जड़
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष डॉ. रवि राय के नेतृत्व में पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने निगम आयुक्त के नाम अपर आयुक्त संतोष टैगोर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया है कि जिन 31 वाहनों को कबाड़ घोषित कर नीलामी के लिए रखा गया है, उनमें से 13 वाहन अभी भी पूरी तरह चालू हालत में हैं। इन वाहनों का उपयोग वर्तमान में निगम के विभिन्न जोन कार्यालयों, उद्यान विभाग, ट्रेंचिंग ग्राउंड और कचरा प्लांट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा रहा है।
आरोप है कि वर्कशॉप विभाग के प्रभारी अधिकारियों ने मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के माध्यम से इनका मूल्यांकन करवाया, जो वास्तविकता से कोसों दूर है। कांग्रेस का दावा है कि बाजार में लाखों रुपये कीमत रखने वाली जेसीबी मशीन का मूल्यांकन मात्र 1 लाख रुपये किया गया है, जबकि सड़क पर दौड़ रही महिंद्रा स्कॉर्पियो की कीमत महज 30 हजार रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की बोली भी अत्यंत कम राशि से शुरू करने की तैयारी है।
प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर उठे सवाल
कांग्रेस ने इस पूरी नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि इन वाहनों को बेचने का निर्णय किस आधार पर और किसके आदेश से लिया गया है। क्या इस बिक्री के लिए परिषद या एमआईसी (मेयर-इन-काउंसिल) से कोई औपचारिक मंजूरी ली गई थी? ज्ञापन में मूल्यांकन करने वाले संस्थान के अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।
डॉ. रवि राय ने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में भी कबाड़ बिक्री के दौरान इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच कमेटी का गठन करना पड़ा था। उनका आरोप है कि एक बार फिर उसी पैटर्न को दोहराकर निगम की संपत्ति को औने-पौने दाम पर बेचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगेगी।
कांग्रेस की चेतावनी और आगे की राह
विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस नीलामी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से नहीं रोका गया, तो वे इस मामले को लोकायुक्त के समक्ष ले जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि चालू हालत के वाहनों को कबाड़ बताकर बेचना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है।
फिलहाल, निगम प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस के कड़े रुख ने अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किन परिस्थितियों में निगम अपने ही उपयोगी संसाधनों को इतनी कम कीमत पर नीलाम करने की जल्दी में है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!