उज्जैन: दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञानदास का साधु समाज से बहिष्कार, आश्रमों में प्रवेश पर लगी रोक
Mahamandaleshwar Gyandas facing social boycott and entry ban in ashrams over rape allegations. दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञान दास का साधु समाज से बहिष्कार, मठ-आश्रमों में प्रवेश पर रोक। निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ज्ञान दास को पद से हटाने की मांग, भंडारों में जाने पर भी प्रतिबंध।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

साधु समाज ने लिया कड़ा फैसला
उज्जैन में एक गंभीर आपराधिक मामले में नाम आने के बाद निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास के खिलाफ साधु समाज ने सख्त रुख अपना लिया है। स्थानीय अखाड़ा परिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए ज्ञानदास को साधु समाज से बहिष्कृत कर दिया है। इस फैसले के तहत अब वे उज्जैन स्थित किसी भी मठ, आश्रम या अखाड़े में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। साथ ही, परिषद ने उनके किसी भी धार्मिक आयोजन में शामिल होने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
यह कार्रवाई महाकाल थाना पुलिस द्वारा एक महिला की शिकायत पर दुष्कर्म, मारपीट और ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज किए जाने के बाद की गई है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि आरोपी पर लगे आरोप संत समाज की गरिमा और मर्यादा के विरुद्ध हैं। महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज और महामंत्री महंत रामेश्वर गिरी महाराज ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के कृत्य से पूरे संत समाज की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है, जिसके चलते यह अनुशासनात्मक कदम उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला और पीड़िता के आरोप
शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, उसकी मुलाकात करीब डेढ़ साल पहले सदावल रोड स्थित दादू आश्रम में ज्ञानदास से हुई थी। महिला का आरोप है कि बाबा ने फेसबुक के माध्यम से संपर्क बढ़ाया और धार्मिक आस्था का लाभ उठाकर उसे आश्रम बुलाया। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गुरु पूर्णिमा 2025 के दौरान उसे आश्रम में सेवा के बहाने रुकने के लिए कहा गया, जहां प्रसाद में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का प्रयास किया। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और अखाड़ा परिषद ने निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ज्ञानदास को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग की है।
वायरल दस्तावेज और चैट से बढ़ी मुश्किलें
आरोपी महामंडलेश्वर के खिलाफ सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक सामग्री वायरल हो रही है। इसमें एक मैरिज सर्टिफिकेट भी शामिल है, जो अक्टूबर 2021 में जारी किया गया था। इस दस्तावेज में ज्ञानदास और एक अन्य महिला की शादी का उल्लेख है। इसके अलावा, बाबा और एक महिला के बीच कथित वॉट्सएप चैट और मारपीट की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि, इन वायरल सामग्रियों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
इन विवादित सबूतों के सामने आने के बाद से ही ज्ञानदास की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुलिस अब इन दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। आश्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद से ही आरोपी ने आश्रम से दूरी बना ली है, जबकि पुलिस ने अपनी जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
वर्तमान में पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। पीड़िता के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साधु समाज द्वारा किए गए बहिष्कार के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अखाड़ा परिषद द्वारा पद से हटाने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है। प्रशासन और पुलिस इस संवेदनशील मामले में पूरी सतर्कता बरत रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
