जनजातीय कार्य विभाग: पदोन्नति के बाद भी अटकी पदस्थापना, सैकड़ों अधिकारी आदेश के इंतजार में
Tribal department promotion posting delay in Dhar, Madhya Pradesh. प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद भी पदस्थापना नहीं होने से सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विभाग ने 12 जुलाई को 178 हाईस्कूल प्राचार्यों को हायर सेकेंडरी प्राचार्य और 20 जुलाई को 279 व्याख्याताओं को हाईस्कूल प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में पदोन्नति पाने वाले सैकड़ों अधिकारी पिछले कई हफ्तों से अपनी नई पदस्थापना के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। विभाग द्वारा पदोन्नति की आधिकारिक घोषणा किए जाने के बावजूद, अब तक तैनाती स्थल स्पष्ट न होने से प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ रहा है। इस देरी के कारण राज्य भर के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन में चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
जुलाई में जारी हुए थे पदोन्नति आदेश
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जनजातीय कार्य विभाग ने जुलाई महीने में दो चरणों में पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की थी। विभाग ने 12 जुलाई को 178 हाईस्कूल प्राचार्यों को हायर सेकेंडरी प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया था। इसके बाद 20 जुलाई को 279 व्याख्याताओं को हाईस्कूल प्राचार्य के पद पर पदोन्नति दी गई। कुल 457 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पदस्थापना आदेशों के अभाव में यह प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।
पदोन्नति के इतने लंबे समय बाद भी तैनाती न मिलने से अधिकारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई अधिकारी अपनी नई भूमिकाओं को संभालने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर आदेश जारी न होने से वे अपने पुराने स्थानों पर ही काम करने को मजबूर हैं।
धार जिले में व्यवस्था पर असर
पदोन्नति के बाद पदस्थापना में हो रही इस देरी का सीधा असर धार जिले के शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ रहा है। जिले में कुल 39 व्याख्याताओं को हाईस्कूल प्राचार्य के पद पर पदोन्नति मिली है, जो अभी भी अपनी नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि नियमित प्राचार्यों की कमी के कारण स्कूलों का प्रबंधन प्रभावित हो रहा है।
वर्तमान स्थिति यह है कि धार जिले के करीब 100 हाईस्कूल नियमित प्राचार्यों के बिना संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों का कामकाज प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है, जो कि एक अस्थायी व्यवस्था है। नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति न होने से स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी और प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है।
प्रशासनिक सुधार की उम्मीदें
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन पदोन्नत अधिकारियों को जल्द ही उनके नए कार्यस्थलों पर नियुक्त कर दिया जाए, तो स्कूलों की कार्यक्षमता में काफी सुधार आएगा। नियमित प्राचार्य के होने से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होती है, बल्कि विद्यालय के दैनिक संचालन और अनुशासन बनाए रखने में भी आसानी होती है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि पदोन्नति के बाद भी पुरानी जिम्मेदारी निभाना कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। नई जिम्मेदारी मिलने से अधिकारी अधिक उत्साह और स्पष्टता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर पाएंगे, जिससे अंततः छात्रों को लाभ मिलेगा।
फिलहाल, पदोन्नत अधिकारी और विभागीय कर्मचारी अब उच्च अधिकारियों के अगले निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। विभाग की ओर से अभी तक पदस्थापना आदेश जारी करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है, जिससे स्कूलों में प्रभारी व्यवस्था ही जारी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
