भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर टीएमसी के बागी सांसदों का खंडन, बोले- हम एनडीए का हिस्सा नहीं
पार्टी के तीन मुस्लिम सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान BJP के साथ करीबी रिश्तों से असहज बताए जा रहे हैं। तीनों ने साफ किया है कि वे BJP में शामिल नहीं होंगे और NDA का हिस्सा नहीं हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए तीन मुस्लिम सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने स्पष्ट किया है कि वे न तो भाजपा में शामिल हो रहे हैं और न ही वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हैं।
एनसीपीआई के साथ जुड़ाव और स्पीकर की मान्यता
ये तीनों सांसद उन 20 बागी नेताओं के समूह का हिस्सा हैं, जिन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की पार्टी से नाता तोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय करने का दावा किया था। हालांकि, तकनीकी रूप से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक उन्हें औपचारिक रूप से NCPI सांसद के तौर पर मान्यता प्रदान नहीं की है। संसद के रिकॉर्ड में अभी भी उन्हें TMC सांसद के रूप में ही संबोधित किया जाता है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सहयोगी दलों के सांसदों की ब्रेकफास्ट मीटिंग में इन तीनों सांसदों की उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दिया था। इसके बाद से ही इनके भाजपा के करीब जाने की अटकलें तेज हो गई थीं, जिसे अब इन नेताओं ने पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।
केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और क्षेत्र के मुद्दे
अबू ताहिर और खलीलुर रहमान ने हाल ही में राज्य सचिवालय में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके अलावा, इन तीनों सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट की थी। सांसदों का कहना है कि उनकी ये मुलाकातें राजनीतिक गठबंधन के लिए नहीं, बल्कि अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास और जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए थीं।
गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में उन्होंने मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग पर कथित पाबंदियों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने जैसी गंभीर चिंताओं को प्रमुखता से रखा था। उन्होंने दोहराया कि वे भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के लोगों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
दूसरी ओर, TMC ने इन बागी सांसदों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब इन सांसदों ने स्पीकर को NCPI में विलय की जानकारी दी थी, तो उस समय NCPI को NDA का सहयोगी माना गया था। कुणाल घोष जैसे नेताओं ने NCPI को भाजपा की 'बी-टीम' करार दिया है।
NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने पार्टी के भीतर किसी भी बड़ी दरार से इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में केवल पश्चिम बंगाल के विकास कार्यों पर चर्चा हुई थी। वहीं, खलीलुर रहमान ने भविष्य के राजनीतिक कदमों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी और समय ही आगे की दिशा तय करेगा।
फिलहाल, इन सांसदों का रुख यह स्पष्ट करता है कि वे फिलहाल किसी भी बड़े राजनीतिक दल के साथ औपचारिक गठबंधन करने के बजाय अपने स्वतंत्र अस्तित्व और क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहते हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय इन सांसदों की राजनीतिक स्थिति को और अधिक स्पष्ट करेगा।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!