टीएमसी फंड का बड़ा खुलासा: 160 करोड़ से खरीदे गए जेट और हेलीकॉप्टर, ईडी की जांच में सनसनीखेज तथ्य
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मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

टीएमसी के फंड से निजी विमान और हेलीकॉप्टर का खेल
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया जांच में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वित्तीय लेनदेन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, पार्टी ने अपने फंड से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को हस्तांतरित किए थे। आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि का उपयोग कंपनी ने एक एम्ब्रेयर जेट और एक अगस्ता वीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए किया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीदने के बाद, केयरवेल एविएशन ने इन्हें वापस टीएमसी को ही किराए पर दे दिया। इस सौदे के तहत टीएमसी को इन सेवाओं के बदले करीब 187 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। यह पूरा मामला वित्तीय अनियमितताओं के घेरे में आ गया है।
सुरक्षा राशि और ऑफशोर कंपनी का कनेक्शन
ईडी की जांच के अनुसार, टीएमसी ने केयरवेल एविएशन को 88.5 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) दी थी। उस समय कंपनी के पास विमान खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। जैसे ही यह राशि कंपनी को मिली, उसने इसे तुरंत गुजरात के गिफ्ट सिटी में स्थित अपनी ऑफशोर इकाई, केयरवेल फ्लाईजेट आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया। इसी फंड का इस्तेमाल जेट और हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया।
इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसियां केमैन आइलैंड से जुड़े 16 करोड़ रुपये से अधिक के एक अन्य संदिग्ध फंड ट्रांसफर की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। यह पूरी प्रक्रिया वित्तीय नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
किराये का भारी-भरकम भुगतान और शर्तें
समझौते के मुताबिक, टीएमसी को जेट के इस्तेमाल के लिए 72 महीने और हेलीकॉप्टर के लिए 56 महीने की अवधि में भुगतान करना था। जीएसटी को छोड़कर इस किराए की कुल राशि 186.9 करोड़ रुपये तय की गई थी। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या पार्टी फंड का उपयोग इस तरह से निजी लाभ या विलासिता के साधनों के लिए किया जाना नियमों के दायरे में आता है।
इस मामले में केयरवेल एविएशन की भूमिका और टीएमसी के साथ हुए इन समझौतों के पीछे के वास्तविक उद्देश्यों को समझने के लिए ईडी लगातार दस्तावेजों को खंगाल रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
जांच का दायरा और भविष्य की कार्रवाई
ईडी के अधिकारी इस पूरे लेनदेन की कड़ी से कड़ी जोड़ रहे हैं। पार्टी फंड का उपयोग इस प्रकार के व्यावसायिक निवेश में करना और फिर उसी से विमान किराए पर लेना कई कानूनी पेचीदगियों को जन्म देता है। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के कोई तत्व शामिल हैं।
फिलहाल, इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस खुलासे के बाद हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी के पास मौजूद साक्ष्य आने वाले समय में कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!