हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सरकार को 7 दिन में नियम फाइनल करने का आदेश, एयरलाइंस को दी चेतावनी
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम बनाने का काम तेज कर दिया गया है। इन नियमों का मकसद भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है और इन्हें तीन हफ्ते में अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हवाई यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
देश में हवाई किराए की अनिश्चितता और एयरलाइंस द्वारा मनमाने शुल्क वसूलने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियमों को अंतिम रूप देने के लिए मात्र सात दिन का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि एयरलाइंस इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें परिचालन से रोकने के लिए विमानों को खड़ा करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में ड्राफ्ट नियम पेश किए। सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने तीन सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन बेंच ने इस पर असहमति जताते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हालांकि एक व्यवस्था का सुझाव दिया गया है, लेकिन नियामक ढांचे को लेकर अभी भी स्पष्टता का अभाव है।
याचिका में उठी स्वतंत्र नियामक की मांग
यह मामला सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक संस्था का होना अनिवार्य है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान में एयरलाइंस मनमाने ढंग से किराए में वृद्धि करती हैं और अतिरिक्त शुल्क के नाम पर यात्रियों का शोषण कर रही हैं, जिस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा को 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया है, जो यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। इसके अलावा, डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम और टिकट रद्दीकरण की नीतियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं।
त्योहारों और संकट के समय मनमानी का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी त्योहारों और खराब मौसम के दौरान हवाई किराए में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त की थी। कोर्ट का मानना है कि नियामक सुरक्षा के अभाव में एयरलाइंस अपनी मनमर्जी चलाती हैं, जिसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ता है। विशेष रूप से अंतिम समय में टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अत्यधिक किराए का सामना करना पड़ता है, जिसे कोर्ट ने शोषणकारी करार दिया है।
अदालत ने जुलाई महीने में भी सरकार को निर्देश दिए थे कि वह भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत बनाए जा रहे नियमों को सीलबंद लिफाफे में पेश करे। कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह हवाई यात्रा को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की जवाबदेही तय करना चाहता है। मामले की अगली सुनवाई अब 7 सितंबर को निर्धारित की गई है।
भविष्य की राह और कानूनी स्थिति
सरकार का कहना है कि नए कानून के तहत नियमों को आधुनिक बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया है कि जब तक नए नियम पूरी तरह लागू नहीं हो जाते, तब तक पुरानी व्यवस्था ही चल रही है, जो यात्रियों के लिए पर्याप्त नहीं है। अब सबकी निगाहें सात दिन बाद आने वाले नियमों और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।
यह कानूनी लड़ाई नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सख्त नियम लागू होते हैं, तो एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लग सकती है और यात्रियों को किराए में होने वाले अनिश्चित उतार-चढ़ाव से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!