सपा छात्र सभा की नीली ड्रेस पर गरमाई सियासत, भाजपा और भीम आर्मी ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी की छात्र सभा के नए ड्रेस कोड को लेकर यूपी की सियासत गरमा गई है। समाजवादी छात्र सभा ने छात्रों के बीच पहुंच बनाने के लिए अब नीली जींस और नीली टी-शर्ट को ड्रेस कोड बनाया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

नीली ड्रेस कोड से शुरू हुआ नया विवाद
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की छात्र सभा द्वारा अपनाए गए नए ड्रेस कोड ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। छात्र सभा ने युवाओं और Gen-Z तक अपनी पहुंच बनाने के उद्देश्य से नीली जींस और नीली टी-शर्ट को अपना आधिकारिक ड्रेस कोड निर्धारित किया है। पार्टी का तर्क है कि नीला रंग किसी विशेष दल का एकाधिकार नहीं है और समाजवादी विचारधारा में सभी रंगों का समावेश है।
इस बदलाव के साथ ही छात्र सभा ने प्रदेश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक 15 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की है। 15 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्रों से संवाद करना और आगामी सरकार से उनकी अपेक्षाओं को समझना है। पार्टी का दावा है कि वे युवाओं के सुझावों को अपने घोषणापत्र में जगह देने की तैयारी कर रहे हैं।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति
समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश सचिव सिराज हुसैन ने इस बदलाव को समय की मांग बताया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कॉलेज जाने वाले युवा जींस और टी-शर्ट में सहज महसूस करते हैं, इसलिए पार्टी ने भी उसी अनुरूप अपनी पहचान बदली है। उनके अनुसार, 'नई सपा, नए लोग और नई पीढ़ी' के नारे के साथ वे युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते हैं।
अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ता छात्रों को पिछली सपा सरकार के दौरान शुरू की गई योजनाओं जैसे लैपटॉप वितरण, कन्या विद्या धन और 'पढ़ो बेटी, बढ़ो बेटी' के बारे में जानकारी दे रहे हैं। पार्टी का लक्ष्य अधिक से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अपनी विचारधारा से अवगत कराना है।
भीम आर्मी और भाजपा का तीखा प्रहार
सपा के इस कदम पर विपक्षी दलों और संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है। भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष कौशल वाल्मीकि ने इसे केवल राजनीतिक लाभ लेने की एक कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि केवल नीली ड्रेस पहनने से कोई बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से नहीं जुड़ जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को अब आंबेडकरवादी समाज की ताकत का एहसास हो रहा है, इसलिए वे इस रंग का सहारा ले रहे हैं।
भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष शिवांग मिश्रा ने भी सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को पहनावा बदलने के बजाय अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता सपा के पुराने बयानों और विवादों से भली-भांति परिचित है और केवल ड्रेस बदलने से उनकी छवि में कोई सुधार नहीं आएगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा के इस फैसले पर विवाद इसलिए अधिक है क्योंकि नीला रंग लंबे समय से दलित और आंबेडकरवादी राजनीति का प्रतीक माना जाता रहा है। इसे अक्सर बसपा के झंडे और विचारधारा से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में सपा का इस रंग को अपनाना अन्य दलों के लिए एक चुनौती और चर्चा का विषय बन गया है।
आने वाले दिनों में यह अभियान कितना सफल होता है और युवा वर्ग इसे किस तरह से स्वीकार करता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, विपक्षी दलों के हमलों के बीच समाजवादी पार्टी अपने इस नए 'ब्लू लुक' के साथ युवाओं के बीच अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रही है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!