सोनम वांगचुक की हिरासत पर भड़के विजेता दहिया, बोले- पुलिस ने की बदसलूकी, गिरफ्तारी से नहीं डरते
Sonam Wangchuk detained by Delhi Police during protest, supporters allege mistreatment and forceful arrest. पुलिस के यहां बहुत सारे लोग आए, वो प्लेन क्लोथ्स (सादी वर्दी) में थे। उन्होंने आते ही वॉलंटियर्स के साथ धक्का-मुक्की की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सोनम वांगचुक की हिरासत के बाद बढ़ा तनाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान शनिवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में ले लिया। वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे। इस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता विजेता दहिया ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विजेता दहिया ने दावा किया कि सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद वॉलंटियर्स के साथ धक्का-मुक्की की और उनके साथ मारपीट की। दहिया के अनुसार, इस दौरान कई वॉलंटियर्स घायल हुए और उनके कपड़े भी फट गए। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताते हुए कहा कि वांगचुक को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जबकि वे अपना अनशन जारी रखना चाहते थे।
गिरफ्तारी की आशंका के बीच दहिया का कड़ा रुख
जंतर-मंतर पर मौजूद विजेता दहिया ने आशंका जताई है कि पुलिस उन्हें और अन्य आंदोलनकारियों को भी कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनके साथी किसी भी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। दहिया ने कहा, 'हम हरियाणवी हैं और डरते नहीं हैं। अगर सरकार को गिरफ्तार करना है तो वे आ सकते हैं, हम यहीं डटे रहेंगे।'
दहिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वांगचुक युवाओं के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को सुनने के बजाय दमनकारी नीति अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में देश भर में हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन मुख्य रूप से नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षाओं में हो रही धांधली के विरोध में शुरू हुआ था। संगठन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। सोनम वांगचुक ने खुद को 'मानद कॉकरोच' बताते हुए छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। 21 दिनों के उपवास के कारण उनका स्वास्थ्य काफी गिर गया था और उनका वजन भी काफी कम हो गया था।
फिलहाल, वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखा गया है। उनकी पत्नी ने इस हिरासत को अवैध बताते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
कौन हैं विजेता दहिया?
हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले विजेता दहिया इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विदेश मंत्रालय में एसएससी-सीजीएल के माध्यम से नौकरी की थी, लेकिन बाद में सिस्टम से मोहभंग होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी। वे लेखन और कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और अब पूरी तरह से इस जन आंदोलन को समर्पित हैं।
दहिया ने अंत में युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने हक के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने फैज अहमद फैज की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति असुरक्षित महसूस कर रहा है, चाहे वह सड़क हो या अस्पताल। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह अहंकार छोड़कर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने पर ध्यान दे।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
