सीकर: 4 साल की बच्ची से छेड़छाड़ करने वाले इलेक्ट्रीशियन को 7 साल की कैद, कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Sikar POCSO court sentences electrician for molesting minor girl, ensuring justice for victim. सीकर की पॉक्सो कोर्ट 1 ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने और रेप करने की कोशिश के मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

घर में घुसकर मासूम को बनाया शिकार
राजस्थान के सीकर जिले की पॉक्सो कोर्ट-1 ने एक बेहद गंभीर मामले में फैसला सुनाते हुए इलेक्ट्रीशियन को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास से जुड़ा है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत डेढ़ लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी व्यक्त की। जज विक्रम चौधरी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना समाज के लिए चिंताजनक है। जब एक इलेक्ट्रीशियन बिजली का काम करने के लिए घर में मौजूद हो और उसी दौरान मासूम बच्ची के साथ ऐसी हरकत करे, तो यह साबित होता है कि घर के भीतर परिजनों की मौजूदगी में भी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। यह टिप्पणी सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
क्या था पूरा मामला
घटनाक्रम के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 30 जुलाई 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 23 जुलाई 2024 को उन्होंने अपने किराए के मकान में बिजली का सबमीटर लगवाने और स्विच ठीक करवाने के लिए एक इलेक्ट्रीशियन को बुलाया था। काम के दौरान बच्ची के पिता किसी जरूरी काम से घर से बाहर गए थे। इसी बीच आरोपी ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वहां खेल रही चार साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी।
आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म का भी प्रयास किया। बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनकर उसकी मां तुरंत कमरे की ओर दौड़ी। मां के आने की आहट मिलते ही आरोपी घबरा गया और मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और गहन जांच के बाद 30 सितंबर 2024 को अदालत में चालान पेश किया। लोक अभियोजक भवानी सिंह जेरठी ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज साक्ष्य के रूप में पेश किए गए। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अदालत ने आरोपी के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे सात साल की कठोर सजा सुनाई है। यह फैसला पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर एक कड़ा संदेश देता है। मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ ही समाज में यह संदेश भी गया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में अदालतें बेहद सख्त रुख अपना रही हैं।
सुरक्षा पर उठते सवाल
इस घटना ने एक बार फिर से घर के भीतर सुरक्षा के मानकों पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर में बुलाते समय सावधानी बरतना और बच्चों को उनकी निगरानी में रखना अत्यंत आवश्यक है। सीकर की इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे सदमे में डाला है, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क रहने के लिए मजबूर किया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
