शिवपुरी: नरवर किले से 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी, 30 हथियारबंद बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों को धमकाया
भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक स्थली नरवर किले से चोरों ने कानून-व्यवस्था और पुरातत्व विभाग की धज्जियां उड़ा दीं। 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश किले के पिछले रास्ते से लोडिंग गाड़ियां लेकर घुसे और पहरा दे रहे सुरक्षाकर्मियों को खदेड़कर 16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप लूट ले गए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

ऐतिहासिक धरोहर पर डाका: सुरक्षा घेरा तोड़ ले गए बेशकीमती तोप
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए एक बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने किले में धावा बोल दिया। ये बदमाश अपने साथ लोडिंग गाड़ियां लेकर आए थे और किले की ओपन कचहरी में रखी 16वीं शताब्दी की एक बेशकीमती ऐतिहासिक तोप को लूटकर ले गए।
नरवर किला न केवल राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक स्थली के रूप में जाना जाता है, बल्कि इसे भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी भी माना जाता है। किले की सुरक्षा में तैनात गार्डों के अनुसार, बदमाशों की संख्या इतनी अधिक थी कि वे उनका विरोध करने में असमर्थ रहे। सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि उनके पास बचाव के लिए केवल एक डंडा था और अंधेरे में बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी देकर वहां से खदेड़ दिया।
12 दिन पहले ही मिल गए थे खतरे के संकेत
हैरानी की बात यह है कि इस डकैती की पटकथा 12 दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी। 5 जुलाई को बदमाशों ने इसी तोप को ओपन कचहरी से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन के कारण वे उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके थे। उस समय प्रशासन की ओर से किले की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका फायदा उठाकर बदमाश पूरी तैयारी और लोडिंग गाड़ियों के साथ वापस लौटे।
किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर मिले टायरों के निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि बदमाश योजनाबद्ध तरीके से भारी-भरकम तोप को गाड़ियों में लादकर ले गए। इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर पुरातत्व विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की कीमत
सिंधिया काल की ये तोपें अष्टधातु, पीतल, तांबा और कांसा के मिश्रण से बनी हैं, जिन पर फारसी और देवनागरी लिपि में राजचिह्न अंकित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐतिहासिक धरोहर होने के कारण इनका मूल्य अमूल्य है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में ऐसी दुर्लभ कलाकृतियों की कीमत करोड़ों में आंकी जाती है। पुलिस अब इस मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की संलिप्तता की जांच कर रही है।
करैरा के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह की सक्रियता से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए जल्द ही मौके का निरीक्षण करने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की बात कही है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई
फिलहाल पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीम मामले की छानबीन में जुटी है। किले में अब 14 में से केवल 13 तोपें ही बची हैं। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और वे ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए किले में स्थायी पुलिस चौकी या सीसीटीवी कैमरों की मांग कर रहे हैं। पुलिस अब आसपास के सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि लूटी गई तोप को बरामद किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!