शिवपुरी: साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबरों का खुलासा, दो सिम धारकों पर पुलिस का शिकंजा
शिवपुरी में साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबरों की जांच के बाद खनियाधाना और मायापुर थाना पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। जांच में दोनों मोबाइल नंबर सिम धारकों के नाम पर पाए गए।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मोबाइल नंबरों की ट्रैकिंग से पकड़े गए आरोपी
शिवपुरी जिले में साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों का खुलासा किया है। खनियाधाना और मायापुर थाना पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर उनके सिम धारकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन नंबरों का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए किया गया था।
साइबर पुलिस मुख्यालय से मिले इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने सिम कार्ड धारकों की पहचान की। पूछताछ और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारी बनकर की 51 हजार की धोखाधड़ी
खनियाधाना थाना क्षेत्र में दर्ज मामले के अनुसार, एक मोबाइल नंबर (6232378702) का इस्तेमाल महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी अजिंक्या प्रकाश माली को ठगने के लिए किया गया था। आरोपी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को विश्वास में लिया और विभिन्न ट्रांजेक्शन के जरिए 51,600 रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जांच में यह नंबर रामरतन लोधी (71) के नाम पर पंजीकृत पाया गया।
पुलिस ने इस मामले में सिम जारी करने वाले पीओएस एजेंट से भी पूछताछ की है। इस मोबाइल नंबर से तमिलनाडु के थूथुकुडी में भी एक अन्य ठगी की शिकायत दर्ज है। पुलिस ने आरोपी रामरतन लोधी के खिलाफ धारा 318(4), 319(2) बीएनएस और 66(डी) आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।
मायापुर में भी सामने आया ठगी का मामला
दूसरे मामले में मायापुर थाना पुलिस ने एक मोबाइल नंबर (7999120858) की जांच की, जो गुजरात के नवसारी जिले में हुई साइबर ठगी से जुड़ा था। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी कि 12 जून 2026 को अनजान फोन कॉल के बाद उसके खाते से चार बार में 5,100 रुपये निकाल लिए गए।
पुलिस जांच में यह सिम कार्ड राममिलन लोधी के नाम पर जारी होना पाया गया। पूछताछ के दौरान राममिलन मोबाइल नंबर के उपयोग और ठगी की रकम के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भी धारा 318(4), 319(2) बीएनएस और 66(डी) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्ड धारकों का गिरोह से क्या संबंध है और ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। सिम कार्ड जारी करने वाले एजेंटों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या सिम फर्जी दस्तावेजों पर जारी किए गए थे या इनका दुरुपयोग किया गया है।
साइबर सेल की टीम अब इन दोनों मामलों में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन कॉल पर अपनी बैंक जानकारी साझा न करें और साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 नंबर पर सूचित करें।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!