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श्योपुर: 782 करोड़ की पेयजल परियोजना के विरोध में 24 घंटे से टावर पर डटी महिला

Shyopur drinking water project land dispute protest update. श्योपुर जिले के श्यारदा गांव में 782.11 करोड़ रुपए की श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना के लिए जमीन खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में एक महिला पिछले 24 घंटे से अधिक समय से बीएसएनएल टावर पर बैठी है। रविवार सुबह टावर पर चढ़ी रामा पत्नी बाबूलाल सोमवार सुबह तक भी नीचे नहीं उतरी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 865
श्योपुर: 782 करोड़ की पेयजल परियोजना के विरोध में 24 घंटे से टावर पर डटी महिला
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जमीन अधिग्रहण के विरोध में टावर पर चढ़ी महिला

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में 782.11 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना के लिए जमीन खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में एक महिला ने मोर्चा खोल दिया है। श्यारदा गांव की निवासी रामा बाई रविवार सुबह से ही बीएसएनएल के टावर पर चढ़ गई हैं। सोमवार सुबह तक वे टावर से नीचे नहीं उतरी थीं, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महिला का कहना है कि जब तक उनकी जमीन के सीमांकन को लेकर स्पष्ट स्थिति साफ नहीं होती, वे नीचे नहीं आएंगी।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। देर रात तक अधिकारियों ने महिला को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। महिला के परिजन और ग्रामीण भी टावर के नीचे डटे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण पूरी रात पहरा देते रहे। महिला का 10 वर्षीय बेटा भी रात भर टावर के नीचे खड़ा होकर अपनी मां को नीचे आने के लिए पुकारता रहा, जिससे वहां मौजूद लोगों में भावुक माहौल बना रहा।

सीमांकन को लेकर उलझा है विवाद

ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में पुरानी गड़बड़ियों और गलत सीमांकन के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। उनका तर्क है कि तीन पट्टाधारियों की कुल 11 बीघा जमीन का सीमांकन अभी बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष सीमांकन में उनकी जमीन परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आती है, तो वे स्वयं कब्जा छोड़ने को तैयार हैं। रविवार को विजयपुर एसडीएम और तहसीलदार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने सोमवार को सीमांकन का आश्वासन दिया था, लेकिन महिला के टावर पर होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका।

यह परियोजना 377 गांवों तक चंबल नदी का पानी पहुंचाने के लिए शुरू की गई है। इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र श्यारदा में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) है। परियोजना के लिए 7.5 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है, जिस पर कब्जा मिलने में हो रही देरी के कारण निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। निर्माण एजेंसी ने अब तक 130 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने और 18 ओवरहेड टंकियों पर काम शुरू करने का दावा किया है, लेकिन प्लांट के बिना यह पूरी कवायद अधूरी है।

परियोजना की राह में पहले भी आई हैं बाधाएं

यह योजना पहले भी दो साल तक वन विभाग की अनुमति के कारण अटकी रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किए जाने के बाद भी चंबल नेशनल पार्क क्षेत्र से पानी लिफ्ट करने की अनुमति न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया था। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद जब काम ने गति पकड़ी, तो अब जमीन विवाद ने नई रुकावट खड़ी कर दी है। वर्तमान में 86 प्रस्तावित टंकियों में से केवल 6 ही पूरी तरह तैयार हो पाई हैं।

प्रशासन अब महिला को सुरक्षित नीचे उतारने और विवाद सुलझाने के लिए नए सिरे से बातचीत करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल, मौके पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और राजस्व विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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