शेखपुरा अपहरण कांड: कोर्ट ने दो आरोपियों को माना दोषी, 14 सितंबर को सुनाई जाएगी सजा
शेखपुरा सिविल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सतीश कुमार झा ने अपहरण के एक मामले में गुरुवार को दो लोगों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने सजा पर सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख तय की है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

शेखपुरा सिविल कोर्ट का बड़ा फैसला
बिहार के शेखपुरा जिले में अपहरण के एक गंभीर मामले में स्थानीय सिविल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश सतीश कुमार झा की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। ये दोनों आरोपी पिछले एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। अदालत ने अब सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
दोषी पाए गए व्यक्तियों की पहचान मंटू कुमार और सूरज कुमार के रूप में हुई है। मंटू कुमार शेखपुरा जिले के महुली थाना क्षेत्र के गोहदा गांव का निवासी है, जबकि उसका साथी सूरज कुमार पड़ोसी जिले नालंदा के सारे थाना क्षेत्र स्थित अमावा गांव का रहने वाला है। इन दोनों को 3 अगस्त 2025 को घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
क्लीनिक जाने के दौरान हुआ था अपहरण
मामले के अनुसार, 3 अगस्त 2025 को ग्रामीण चिकित्सक राजो रजक के पुत्र मनोज कुमार अपने घर से अरियरी गांव की ओर जा रहे थे, जहां उन्हें अपना नया क्लीनिक खोलना था। रास्ते में कार सवार बदमाशों ने उन्हें जबरन अगवा कर लिया। आरोपियों ने मनोज के हाथ-पैर बांध दिए और उनके मुंह पर पट्टी बांधकर उन्हें कार में डाल लिया। अपहरणकर्ता उन्हें शेखपुरा की ओर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी गाड़ी खराब हो गई।
इसी दौरान गश्त पर निकली डायल-112 की पुलिस टीम की नजर हुसैनाबाद पेट्रोल पंप के पास खड़ी संदिग्ध कार पर पड़ी। पुलिस को देखते ही मनोज कुमार ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर आरोपी भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मंटू और सूरज को मौके पर ही दबोच लिया। हालांकि, गिरोह के अन्य सदस्य भागने में सफल रहे।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सजा
पुलिस ने पीड़ित मनोज कुमार को सुरक्षित मुक्त कराया और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कार की तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में शराब भी बरामद हुई, जिसके कारण इस मामले की सुनवाई उत्पाद मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष हुई। सरकारी वकील अरविंद कुमार ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से अदालत के सामने रखा।
न्यायालय में इस मामले को लेकर पीड़ित, उनके परिवार के सदस्यों और पुलिस अधिकारियों सहित कुल 13 लोगों ने गवाही दी। इसके अलावा तकनीकी सेल के साक्ष्यों और पुलिस रिपोर्ट को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया। सभी गवाहों और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने इसे एक गंभीर अपराध माना।
अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, जिनमें 127(2), 109 और 140 शामिल हैं, के साथ-साथ उत्पाद अधिनियम की धारा 30ए के तहत दोषी पाया है। निर्णय सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच वापस मंडल कारागार भेज दिया गया है। अब 14 सितंबर को सजा की अवधि पर बहस होगी, जिसके बाद अदालत अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!