गन्ना उत्पादन में शामली का दबदबा बरकरार, लगातार आठवीं बार प्रदेश में हासिल किया शीर्ष स्थान
Shamli leads UP in sugarcane production for 8th time. शामली ने लगातार आठवीं बार उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन में पहला स्थान हासिल किया है। पेराई सत्र 2025-26 की क्रॉप कटिंग रिपोर्ट के अनुसार, जनपद ने 969.12 कुंतल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज के साथ प्रदेश में अपनी बादशाहत कायम रखी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र में शामली जिले ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी है। पेराई सत्र 2025-26 की हालिया क्रॉप कटिंग रिपोर्ट के अनुसार, शामली ने गन्ना उत्पादन के मामले में पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह लगातार आठवां मौका है जब इस जिले ने गन्ना उत्पादकता में अपनी बादशाहत कायम रखी है, जिससे यह क्षेत्र राज्य के कृषि मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।
969.12 कुंतल प्रति हेक्टेयर की शानदार औसत उपज
नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, शामली जिले में गन्ने की औसत उपज 969.12 कुंतल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2023-24 के रिकॉर्ड स्तर 1036.04 कुंतल प्रति हेक्टेयर से थोड़ा कम है, लेकिन इसके बावजूद कोई अन्य जिला शामली के उत्पादन स्तर को चुनौती देने में विफल रहा है। इस उपलब्धि के साथ शामली ने साबित कर दिया है कि आधुनिक कृषि तकनीकों के सही उपयोग से उत्पादकता को उच्च स्तर पर बनाए रखा जा सकता है।
प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति पर नजर डालें तो बागपत 914.16 कुंतल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज के साथ दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि मुजफ्फरनगर 900.96 कुंतल प्रति हेक्टेयर के साथ तीसरे पायदान पर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र गन्ना उत्पादन में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
सफलता के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और किसानों की मेहनत
जिला गन्ना अधिकारी रणजीत सिंह कुशवाह ने इस निरंतर सफलता का श्रेय जिले के किसानों की अथक मेहनत और वैज्ञानिक खेती के प्रति उनकी जागरूकता को दिया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर दी गई तकनीकी सलाह और किसानों द्वारा उसे जमीन पर उतारने के तालमेल ने ही यह संभव बनाया है। उन्नत प्रजातियों का चयन और बुवाई के सही समय का पालन करना इस सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं।
इसके अलावा, खेतों में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और कीट एवं रोगों के समय रहते प्रबंधन ने फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बढ़ाने में मदद की है। विभाग का मानना है कि यदि किसान इसी तरह आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते रहे, तो भविष्य में उत्पादकता के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकेंगे।
लगातार आठ वर्षों का स्वर्णिम सफर
शामली की यह उपलब्धि महज एक संयोग नहीं है, बल्कि वर्ष 2018-19 से शुरू हुआ एक निरंतर सफर है। पिछले आठ वर्षों से जिला लगातार प्रदेश में प्रथम स्थान पर काबिज है। वर्ष 2023-24 में जिले ने 1036.04 कुंतल प्रति हेक्टेयर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर रहा है। यह निरंतरता जिले के कृषि ढांचे की मजबूती को दर्शाती है।
आने वाले समय में प्रशासन का जोर अब इस उत्पादकता को और अधिक टिकाऊ बनाने पर है। किसानों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने और कम पानी में अधिक पैदावार लेने वाली तकनीकों के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है। शामली की यह सफलता न केवल जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ानटिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
