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सीहोर: 97 करोड़ के देवी लोक में पहली बारिश ने खोली पोल, छत से टपका पानी और दरकीं दीवारें

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

21 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
सीहोर: 97 करोड़ के देवी लोक में पहली बारिश ने खोली पोल, छत से टपका पानी और दरकीं दीवारें
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महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता पर उठे सवाल

सीहोर स्थित प्रसिद्ध सलकनपुर देवी धाम में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जा रहे 'देवी लोक' का निर्माण कार्य पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग 97 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहे इस परिसर में निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव के दावों की पोल खुल गई है। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही परिसर की इमारतों से पानी रिसने और दीवारों में दरारें आने की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे श्रद्धालुओं में भारी निराशा है।

परियोजना के तहत करीब 90.35 करोड़ रुपये केवल सिविल निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए हैं। इनमें से 64 योगिनी मंदिर के पिलरों के किनारों से पानी टपकता हुआ देखा गया है। निर्माण कार्य की ऐसी स्थिति ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के निवेश की उपयोगिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पौधरोपण में लापरवाही और अधूरी प्रतिमा स्थापना

परिसर को हरा-भरा बनाने के नाम पर भी बड़ा खेल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, यहां 444 पौधे लगाए गए थे, जिनमें से प्रत्येक पौधे पर लगभग 1800 रुपये का खर्च दिखाया गया था। हालांकि, उचित देखरेख के अभाव में इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक पौधे सूख चुके हैं। इतने बड़े बजट के बावजूद हरियाली का नामोनिशान न होना जिम्मेदार एजेंसियों की उदासीनता को दर्शाता है।

इसके अलावा, आदिशक्ति पेडस्टल का काम भी अधूरा पड़ा है। निर्माण एजेंसी ने जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रतिमा स्थापित करने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में वहां कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है। प्रतिमा के बिना यह महत्वपूर्ण स्थल अपनी पहचान खो रहा है, जिससे आने वाले भक्तों को मायूसी हाथ लग रही है।

सुविधाओं का अभाव और सुरक्षा को खतरा

परियोजना के रखरखाव का जिम्मा निर्माण एजेंसी के पास है, जिसे निर्माण के बाद तीन वर्षों तक इसकी देखभाल करनी है। इसके बावजूद, धर्मशाला, मार्केट और मेला ग्राउंड जैसे क्षेत्रों में गंदगी, कीचड़ और कचरे का अंबार लगा हुआ है। परिसर में लगी अधिकांश हाईमास्ट लाइटें या तो बंद पड़ी हैं या फिर लटक रही हैं, जिससे रात के समय श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

मणिदीप क्षेत्र में बिछाए गए बंसी पहाड़पुर पत्थरों पर बारिश का पानी जमा होने से फिसलन बढ़ गई है। यह स्थिति श्रद्धालुओं के लिए किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। रायसेन से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना समझ से परे है।

प्रशासन का रुख और आगामी कदम

इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती ने कहा कि उन्हें पानी टपकने और पौधों के सूखने की जानकारी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्थल का निरीक्षण किया जाएगा और जो भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इन खामियों को दूर कर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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