सतना बाघ शिकार मामला: मुख्य आरोपी की मौत के साथ उलझा 14 नाखूनों का रहस्य
Satna tiger poaching investigation hit as key accused Munna Kol dies. मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की 18 जुलाई को गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। उसकी मौत के बाद बाघ के गायब 14 नाखूनों का रहस्य और गहरा गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जांच की मुख्य कड़ी टूटी, मुख्य आरोपी मुन्ना कोल का निधन
मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र में हुए बाघ के शिकार मामले में जांच एक बड़े मोड़ पर आकर रुक गई है। इस मामले के मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की 18 जुलाई को मौत हो गई। मुन्ना कोल लंबे समय से फरार चल रहा था और वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही बाघ के गायब अंगों और तस्करी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा। उसकी मृत्यु के साथ ही जांच की सबसे अहम कड़ी टूट गई है।
वन विभाग द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य 10 आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बार-बार यह स्पष्ट किया था कि बाघ के नाखूनों और केनाइन (नुकीले दांतों) का असली ठिकाना केवल मुन्ना कोल को ही पता था। इस घटना को करीब ढाई महीने पहले अंजाम दिया गया था, लेकिन वन विभाग को इसकी जानकारी दो महीने बाद मिली। अब मुख्य आरोपी के न रहने से उन 14 नाखूनों का पता लगाना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है जो अभी भी बरामद नहीं हो सके हैं।
साक्ष्यों को छिपाने की साजिश और पैरों को गाड़ने का खुलासा
जांच में यह बात सामने आई है कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने साक्ष्य मिटाने के लिए उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में गाड़ दिए थे। अन्य आरोपियों सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। जब गिरोह के अन्य सदस्यों ने नाखूनों के बारे में पूछताछ की, तो मुन्ना कोल ने यह दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए हैं, जिसके कारण केवल चार नाखून ही मिल पाए थे। यह बयान अब पूरी तरह से संदिग्ध लग रहा है।
वन विभाग के अनुसार, घटना के उजागर होने के बाद से ही मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और अलग-अलग स्थानों पर छिपकर इलाज करा रहा था। विभाग की टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं, लेकिन कानून की गिरफ्त में आने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ये नाखून किसी तस्कर को सौंपे गए थे या उन्हें कहीं और छिपाया गया है।
करंट लगाकर किया गया था शिकार
यह पूरा मामला करीब ढाई महीने पहले कररिया बीट के जंगल में सामने आया था। शिकारियों ने बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। शिकार के बाद शव को गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। वन विभाग को इस जघन्य अपराध की भनक 15 दिन पहले लगी थी, जिसके बाद 3 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर जेसीबी की मदद से बाघ का शव बरामद किया गया था।
पोस्टमार्टम और जांच में करंट लगने से बाघ की मौत की पुष्टि हुई थी। इस मामले में कुल 11 आरोपियों की पहचान की गई थी, जिनमें से 10 आरोपी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की भूमिकाओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है।
वन विभाग के सामने अब क्या है चुनौती?
मुख्य आरोपी की मौत के बाद वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे उन 14 गायब नाखूनों तक कैसे पहुंचें। विभाग अब अन्य 10 आरोपियों से फिर से पूछताछ करने की तैयारी कर रहा है ताकि यह पता चल सके कि क्या मुन्ना कोल ने किसी अन्य व्यक्ति को ये नाखून सौंपे थे। इस मामले ने वन्यजीव संरक्षण की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आने वाले दिनों में वन विभाग की टीम उन सभी संभावित ठिकानों की फिर से तलाशी ले सकती है जहां मुन्ना कोल के छिपने की सूचना थी। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश दिया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
