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सतना: 29 साल से भवन का इंतजार, सड़क किनारे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर मासूम

पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बच्चों की कक्षाएं सड़क किनारे लगाई जा रही हैं। जिस सड़क पर बच्चे बैठकर पढ़ते हैं, वहां दिनभर दोपहिया वाहनों के साथ ट्रैक्टर, डंपर और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

9 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
सतना: 29 साल से भवन का इंतजार, सड़क किनारे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर मासूम
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मध्य प्रदेश के सतना जिले की कोठी तहसील के दिदौध गांव में शिक्षा व्यवस्था की एक भयावह तस्वीर सामने आई है। यहां के भरसिहान टोला में स्थित सरकारी प्राथमिक शाला के बच्चे पिछले 29 वर्षों से अपने स्कूल भवन का इंतजार कर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क किनारे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

सड़क ही बनी कक्षा, वाहनों के बीच पढ़ाई

वर्ष 1997 से संचालित इस स्कूल के पास अपना कोई स्थायी भवन नहीं है। वर्तमान में स्कूल एक किराए के कमरे में चलाया जा रहा है, लेकिन जगह की कमी के कारण सभी बच्चों को वहां बैठाना संभव नहीं हो पाता। इस मजबूरी के चलते शिक्षकों को मजबूरन सड़क के किनारे कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। यह सड़क गांव का मुख्य मार्ग है, जहां से दिनभर ट्रैक्टर, डंपर और अन्य भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है।

सड़क पर पढ़ाई के दौरान बच्चों को लगातार शोर-शराबे और वाहनों के हॉर्न का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी एकाग्रता भंग होती है। सबसे गंभीर चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क के किनारे बैठकर पढ़ना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। इसके अलावा, सड़क पर घूमने वाले आवारा पशु भी बच्चों के लिए खतरा बने रहते हैं।

तीन दशक का लंबा इंतजार और कोरे आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल शुरू होने के समय से ही भवन निर्माण की मांग की जा रही है। पिछले तीन दशकों में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन स्कूल की बदहाली जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने जनपद पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।

बारिश के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। सड़क किनारे कक्षाएं लगाना असंभव हो जाता है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई कई दिनों तक बाधित रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है।

प्रशासन का पक्ष और ग्रामीणों की चेतावनी

इस मामले पर सतना के डीपीसी दिवाकर तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि स्कूल फिलहाल एक निजी घर में संचालित हो रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि भवन न होने की समस्या है और वे सड़क पर कक्षाएं लगने की परिस्थितियों की जांच करवाएंगे। डीपीसी ने दावा किया कि विद्यालय के लिए अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए गए हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

हालांकि, प्रशासन के इन दावों से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे अपने बच्चों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर उग्र प्रदर्शन करेंगे और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। 29 साल का लंबा इंतजार अब ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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