सहारनपुर: सिपाही राहुल ढाका हत्याकांड में मुकीम काला गिरोह के दो सदस्य दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
Saharanpur court sentences Muqeem Kala gang members to life imprisonment for police officer murder case. सहारनपुर में करीब 13 साल पहले मुकीम काला गिरोह का पीछा कर रहे सीओ के गनर एवं सिपाही राहुल ढाका की गोली मारकर हत्या की गई थी। गुरुवार को कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

13 साल पुराने मामले में न्याय
सहारनपुर की एक अदालत ने 13 साल पुराने चर्चित सिपाही हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुकीम काला गिरोह के दो सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार-5 की अदालत ने महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर उर्फ खां साहब को हत्या, लूट और हत्या के प्रयास का दोषी पाया। मुख्य आरोपी मुकीम काला की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है, जिसके कारण उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
अदालत ने दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-357 के तहत, वसूले गए जुर्माने का 50 प्रतिशत हिस्सा शहीद सिपाही राहुल ढाका के परिजनों को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है। दोनों दोषी वर्तमान में राजस्थान की जयपुर और अजमेर की जेलों में बंद हैं, जिन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाई गई।
क्या थी 2013 की घटना?
यह मामला 4 जून 2013 का है, जब हरियाणा के यमुनानगर में पेट्रोल पंप लूटने के बाद मुकीम काला गिरोह के बदमाश सहारनपुर की ओर भागे थे। सूचना मिलने पर तत्कालीन सीओ सदर उमेश कुमार यादव की टीम ने बदमाशों की कार का पीछा किया। सर्किट हाउस रोड के पास पुलिस ने बदमाशों को घेर लिया। जब सिपाही राहुल ढाका ने कार की खिड़की खोलने का प्रयास किया, तो बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोलीबारी के बाद बदमाश सिपाही की सरकारी कारबाइन और मैगजीन लूटकर फरार हो गए थे। भागने के दौरान उन्होंने राहगीरों को हथियारों के बल पर डराकर कई बाइकें भी लूटीं। इस दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच लंबी मुठभेड़ चली थी, जिसने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दहशत फैला दी थी।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सजा
इस मामले में 2018 में आरोप तय किए गए थे और 2021 से गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने तत्कालीन सीओ, पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों और प्रत्यक्षदर्शियों सहित कई महत्वपूर्ण गवाह अदालत में पेश किए। अदालत ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद महताब और सादर को दोषी करार दिया। हत्या के अपराध में उम्रकैद के अलावा, लूट और हत्या के प्रयास के मामलों में भी उन्हें अलग-अलग कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
मुकीम काला गिरोह का खौफ उस समय चरम पर था। इस गिरोह ने तनिष्क ज्वेलरी शोरूम डकैती और कई व्यापारियों से रंगदारी मांगने जैसी वारदातों को अंजाम दिया था। गैंग का शार्प शूटर साबिर जंधेड़ी, जिसने राहुल ढाका पर गोली चलाई थी, जनवरी 2018 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
न्यायिक प्रक्रिया का समापन
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही, दोषियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील करने के कानूनी अधिकार के बारे में भी सूचित किया गया। इस फैसले को पुलिस बल के मनोबल और न्याय प्रणाली की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मुकीम काला गिरोह के खिलाफ पुलिस ने लंबे समय तक अभियान चलाया था। गिरोह के कई सदस्य अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं या विभिन्न जेलों में सजा काट रहे हैं। 13 साल बाद आए इस फैसले ने शहीद सिपाही के परिवार को न्याय की उम्मीद पूरी की है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
