रेवाड़ी में सक्रिय अंतरराज्यीय भैंस चोर गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
रेवाड़ी में कोसली सीआईए ने अंतरराजीय भैंस चोर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वारदात को अंजाम देने से पहले रैकी करते थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

रेकी कर पशुओं को बनाते थे निशाना
हरियाणा के रेवाड़ी जिले में पशुपालकों के लिए सिरदर्द बने एक अंतरराज्यीय भैंस चोर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कोसली सीआईए की टीम ने इस गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये आरोपी सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देते थे और चोरी किए गए पशुओं को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच देते थे।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान महेंद्रगढ़ के बसई गांव निवासी राजू बंजारा, जयपुर (राजस्थान) के जयसिंहपुरा खोर निवासी गोपी उर्फ पांडू बंजारा और बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के बड़तौली निवासी मोहम्मद सलमान के रूप में हुई है। इन आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
एक महीने में कबूलीं छह वारदातें
मामले का खुलासा तब हुआ जब 11-12 जुलाई की रात रोहड़ाई थाना क्षेत्र से भैंस और कटड़ी चोरी होने की घटना की जांच कोसली सीआईए को सौंपी गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गहन छानबीन के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पिछले एक महीने के भीतर रेवाड़ी में चार, महेंद्रगढ़ में एक और चरखी दादरी में एक पशु चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। इस दौरान उन्होंने कुल सात भैंस और तीन कटड़ी चोरी करने की बात कबूली है।
डीएसपी सुरेंद्र श्योराण ने बताया कि आरोपी वारदात से पहले बाकायदा रेकी करते थे। गिरोह के सदस्यों के काम बंटे हुए थे, जिसमें मोहम्मद सलमान पशु व्यापारी का भेष बनाकर भैंसों की पहचान करता था। इसके बाद अन्य साथी स्थान तय करते थे और पिकअप वाहन के जरिए पशुओं को उठाकर फरार हो जाते थे।
उत्तर प्रदेश के मेलों में खपाते थे चोरी का माल
जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी के बाद सभी आरोपी एक पूर्व निर्धारित स्थान पर इकट्ठा होते थे। वहां से चोरी किए गए पशुओं को उत्तर प्रदेश ले जाया जाता था, जहां उन्हें स्थानीय पशु मेलों में बेच दिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में और भी कई लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और पहले भी इनके खिलाफ पशु चोरी के मामले दर्ज हैं। रिमांड के दौरान पुलिस अब इन आरोपियों से चोरी किए गए पशुओं की बरामदगी और गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की पहचान करने का प्रयास करेगी।
आगे की कार्रवाई
चार दिन के पुलिस रिमांड में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां तक जुड़े हैं। पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में कई अन्य चोरी की घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।
फिलहाल, कोसली सीआईए की टीम मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। इस गिरफ्तारी से क्षेत्र के पशुपालकों ने कुछ राहत की सांस ली है, लेकिन गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!