रतलाम हत्याकांड: खोपड़ी और डीएनए रिपोर्ट से खुला चार साल पुराना राज, दो दोषियों को उम्रकैद
रतलाम में 4 साल पहले हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मृतक की खोपड़ी से मिले सुराग से कोर्ट ने दो आरोपियों को दोष सिद्ध पाते हुए आजीवान कारावास और अर्थदंड की सजा दी है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

चार साल बाद मिला न्याय: खोपड़ी बनी सबूत
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में चार साल पहले हुई एक नृशंस हत्या के मामले में स्थानीय अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में मृतक की खोपड़ी और अन्य मानव अवशेषों ने जांच की दिशा बदल दी थी, जिससे अपराधियों को कानून के दायरे में लाना संभव हो सका।
घटना की शुरुआत नवंबर 2022 में हुई थी, जब ग्राम कालाखेत निवासी राजू उर्फ राजपाल को कुछ लोग जबरन बाइक पर बैठाकर ले गए थे। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला, तो परिजनों ने शिवगढ़ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की, लेकिन उस समय कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा था।
डीएनए जांच ने खोली साजिश की परतें
जांच में बड़ा मोड़ तब आया जब 10 दिसंबर 2022 को मृतक के मामा को जामण पाटली तलाई के पास एक मानव खोपड़ी मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खोपड़ी और अन्य हड्डियां बरामद कीं। इन अवशेषों को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) इंदौर भेजा गया। डीएनए टेस्ट के जरिए यह वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हुई कि बरामद अवशेष राजू उर्फ राजपाल के ही थे। इस रिपोर्ट ने केस को पूरी तरह से बदल दिया।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, राजू को आखिरी बार आरोपी कालू और बंटी के साथ देखा गया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए एक नाबालिग के मोबाइल फोन से वीडियो बरामद किया, जिसमें आरोपियों द्वारा मृतक को ले जाने और उसके साथ मारपीट करने के दृश्य कैद थे। इन डिजिटल साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के दावे को और अधिक मजबूत कर दिया।
अदालत का फैसला और सजा
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी कालू पिता कांतिलाल अमलियार और बंटी उर्फ कमलेश पिता उदयराम सोलंकी ने सुनियोजित तरीके से राजू का अपहरण किया और उसकी हत्या कर शव को गड्ढे में दबा दिया था। कोर्ट ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, प्रत्येक दोषी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों का अभाव था, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और डिजिटल वीडियो ने मामले को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य मिटाने और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
कानूनी प्रक्रिया और निष्कर्ष
बचाव पक्ष की ओर से मृतक के जीवित होने का कोई भी प्रमाण पेश नहीं किया जा सका। अदालत ने अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में दोनों आरोपियों को दोषी पाया। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच के दम पर बरसों पुराने मामलों को सुलझाया जा सकता है और अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है।
इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि कैसे एक खोपड़ी के टुकड़े ने चार साल बाद कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस और अभियोजन पक्ष की मेहनत रंग लाई और पीड़ित परिवार को न्याय मिला। अब यह मामला अन्य लंबित मामलों के लिए एक नजीर बन गया है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!