ज्ञान भारतम् मिशन: पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में राजस्थान ने रचा इतिहास, बना देश का नंबर वन राज्य
Rajasthan tops India in manuscript digitization under Gyan Bharatam Mission, says Deputy CM Diya Kumari. ज्ञान भारतम् मिशन के तहत भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा के संरक्षण और डिजिटलीकरण के राष्ट्रीय अभियान में राजस्थान ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने बताया कि देशभर में सर्वाधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का योगदान राजस्थान से हो रहा है, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान ने देश की प्राचीन ज्ञान-संपदा को सहेजने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 'ज्ञान भारतम् मिशन' के अंतर्गत चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान में राजस्थान ने सर्वाधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ ही राजस्थान पूरे देश में इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने दी जानकारी
राज्य की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभर में पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के आंकड़ों में राजस्थान का योगदान सबसे अधिक रहा है। दीया कुमारी ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच को दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही भारत की अमूल्य ज्ञान-संपदा के संरक्षण का यह राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया था, जो आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने इस कार्य में लगे संस्कृति मंत्रालय और ज्ञान भारतम् मिशन की पूरी टीम के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय और निरंतर सहयोग के कारण ही राजस्थान इस कठिन और महत्वपूर्ण कार्य को इतने बड़े पैमाने पर पूरा कर सका है।
सामूहिक प्रयासों से मिली सफलता
इस मिशन की सफलता के पीछे कई संस्थाओं और व्यक्तियों का योगदान रहा है। दीया कुमारी ने राज्य के विभिन्न पांडुलिपि भंडारों, प्राचीन मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों और शोध संस्थानों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के पास मौजूद पांडुलिपियां भारतीय इतिहास और ज्ञान का आधार हैं, जिन्हें सहेजने के लिए स्वयंसेवकों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने इसे अपना मिशन मानकर काम किया है।
उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में बिखरी हुई ज्ञान-संपदा को एक सूत्र में पिरोने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य इन प्राचीन पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी से जोड़ना है, ताकि यह धरोहर न केवल सुरक्षित रहे, बल्कि शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए भी आसानी से उपलब्ध हो सके।
भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित होगी विरासत
डिजिटलीकरण का यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार साबित होगा। डिजिटल माध्यम से पांडुलिपियों के संरक्षित होने से उनके नष्ट होने का खतरा कम हो जाएगा और वे लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगी। यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी मददगार साबित होगी।
दीया कुमारी ने विश्वास जताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से राजस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अपनी अग्रणी भूमिका को आगे भी बनाए रखेगा। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार प्रयासरत है कि प्रदेश के हर कोने में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों को खोजा जाए और उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाए।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
