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राजस्थान: फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती विज्ञापन में बड़ी चूक, 38 साल पुराने बंद डिप्लोमा को बनाया आधार

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
राजस्थान: फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती विज्ञापन में बड़ी चूक, 38 साल पुराने बंद डिप्लोमा को बनाया आधार
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भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता को लेकर गंभीर विसंगति

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा हाल ही में जारी की गई फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती का विज्ञापन एक बड़ी तकनीकी खामी के चलते वापस ले लिया गया है। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा भेजी गई गलत शैक्षणिक योग्यता के आधार पर यह विज्ञापन जारी हुआ था, जिसमें 38 साल पहले बंद हो चुके डिप्लोमा पाठ्यक्रम को पात्रता का मुख्य आधार बनाया गया था।

आयोग ने 21 जुलाई 2026 को फिजियोथेरेपिस्ट के 20 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, विज्ञापन जारी होते ही शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठने लगे थे। विज्ञापन में स्पष्ट रूप से 10वीं कक्षा के साथ डिप्लोमा की अनिवार्यता रखी गई थी, जबकि प्रदेश में फिजियोथेरेपी से संबंधित डिप्लोमा कोर्स वर्ष 1988 में ही बंद कर दिए गए थे।

डिग्रीधारी अभ्यर्थी आवेदन से हो रहे थे वंचित

इस विसंगति के कारण प्रदेश के हजारों बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) डिग्रीधारी अभ्यर्थी आवेदन करने में असमर्थ थे। योग्यता के पुराने नियमों को आधार बनाए जाने से योग्य उम्मीदवारों में भारी आक्रोश था। जानकारों का कहना है कि जब वर्तमान में डिग्री पाठ्यक्रम ही मान्य हैं, तो दशकों पुराने बंद हो चुके डिप्लोमा को पात्रता में शामिल करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद चिकित्सा विभाग ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आरपीएससी को विज्ञापन वापस लेने का प्रस्ताव भेजा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद ही नई योग्यता के साथ भर्ती निकाली जाएगी।

आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

यह इस वर्ष का पहला ऐसा मामला है जब आरपीएससी को विज्ञापन जारी करने के बाद उसे वापस लेना पड़ा है। आयोग के सचिव आशुतोष गुप्ता ने पुष्टि की है कि भर्ती का विज्ञापन फिलहाल निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा नियमों में संशोधन किए जाने के बाद ही संशोधित प्रस्ताव आयोग को प्राप्त होगा, जिसके बाद ही पुनः भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

इस घटनाक्रम ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भर्ती नियमों को अपडेट न करने और बिना जांचे-परखे विज्ञापन जारी करने के कारण न केवल प्रशासनिक समय बर्बाद हुआ है, बल्कि हजारों युवाओं का भविष्य भी अधर में लटक गया है। अब अभ्यर्थियों को नए नियमों के आने और दोबारा विज्ञापन जारी होने का इंतजार करना होगा।

आगे की राह और सुधार की उम्मीद

चिकित्सा विभाग अब नए सिरे से भर्ती के नियमों को तय करने की कवायद में जुट गया है। उम्मीद की जा रही है कि संशोधन के दौरान वर्तमान शैक्षणिक मानकों को ध्यान में रखा जाएगा ताकि डिग्रीधारी युवाओं को आवेदन का मौका मिल सके। फिलहाल, इस भर्ती प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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