राजस्थान में ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व सर्वे की समय सीमा बढ़ी, अब 26 जुलाई तक पूरा करना होगा काम
Rajasthan OBC political representation survey deadline extended till 26 July. राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) परिवारों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व संबंधी सर्वे कार्य की लास्ट डेट बढ़ा दी है। आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया- सचिव (सलाहकार) अशोक कुमार जैन ने सभी जिला कलेक्टरों से 26 जुलाई तक सर्वे कार्य शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सर्वे की समय सीमा में विस्तार
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने राज्य में ओबीसी परिवारों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को समझने के लिए चलाए जा रहे सर्वे की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। अब यह महत्वपूर्ण सर्वे कार्य 26 जुलाई, 2026 तक पूरा किया जा सकेगा। आयोग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ के अनुसार, सचिव (सलाहकार) अशोक कुमार जैन ने सभी जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत सर्वे का कार्य पूर्ण हो जाए। यह सर्वे 10 जुलाई से 'राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप' के माध्यम से पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है।
समीक्षा में सामने आई धीमी प्रगति
आयोग ने 23 जुलाई को सर्वे कार्य की प्रगति की गहन समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में अब तक निर्धारित लक्ष्य का केवल 69.86 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में सर्वे की गति धीमी पाई गई, जिसके कारण आयोग को समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई के बाद सर्वे की अवधि में किसी भी स्थिति में और विस्तार नहीं किया जाएगा। यह कार्य राजस्थान उच्च न्यायालय के 20 जुलाई को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में किया जा रहा है, जिसके तहत आयोग को अपनी अनुशंसा रिपोर्ट 5 अगस्त, 2027 तक राज्य सरकार को सौंपनी है।
आरक्षण नीति के लिए महत्वपूर्ण है डेटा
यह सर्वे पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग के आरक्षण के निर्धारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग का मानना है कि सर्वे से प्राप्त सटीक आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही वे राज्य सरकार को एक ठोस अनुशंसा रिपोर्ट प्रस्तुत कर पाएंगे, जिससे भविष्य में आरक्षण संबंधी नीतियों को मजबूती मिलेगी।
आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर पर प्रगणकों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए कहा गया है ताकि समय पर रिपोर्ट तैयार की जा सके।
आगे की राह
आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि सर्वे का डेटा ही भविष्य की राजनीतिक भागीदारी का आधार बनेगा। इसलिए, सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी परिवार या क्षेत्र सर्वे से वंचित न रहे। जिला प्रशासन को अब अगले कुछ दिनों में शेष 30 प्रतिशत से अधिक कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करना होगा।
आयोग की ओर से जारी निर्देशों के बाद अब सभी जिलों में सर्वे की गति तेज होने की उम्मीद है। राज्य सरकार और उच्च न्यायालय की निगरानी में हो रहे इस सर्वे के परिणाम राजस्थान में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
