राजस्थान निकाय चुनाव: कहीं रिकॉर्ड मतदान तो कहीं सुस्ती, सीएम के गृह जिले में बढ़ा वोटिंग प्रतिशत
प्रदेश के 309 में से 162 शहरी निकायों में बुधवार को चुनाव हुए। कई जगह वोटिंग के रिकॉर्ड टूटे हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

प्रदेश के 162 निकायों में मतदान संपन्न
राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों के तहत बुधवार को 162 निकायों में मतदान प्रक्रिया पूरी हुई। इस बार प्रदेश भर में औसत मतदान लगभग 72 प्रतिशत दर्ज किया गया है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मतदान के आंकड़ों में काफी भिन्नता देखने को मिली है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच जीत-हार को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। कई स्थानों पर मतदान के पुराने रिकॉर्ड टूटे हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत में गिरावट ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में इस बार मतदान का उत्साह बढ़ा है। पिछले चुनावों में जहां 71.86 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 73.13 प्रतिशत तक पहुंच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस के अलावा आरएलडी और निर्दलीय प्रत्याशियों की सक्रियता के कारण यहां मुकाबला त्रिकोणीय और रोचक बना हुआ है।
भीलवाड़ा और चूरू में मतदान में गिरावट
एक ओर जहां कई निकायों में वोटिंग बढ़ी है, वहीं भीलवाड़ा में मतदान प्रतिशत में 3.29 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, जो चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, इसी जिले की बिगोद नगरपालिका में 91 फीसदी से अधिक रिकॉर्ड मतदान हुआ है। दूसरी ओर, वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ के गृह जिले चूरू में भी मतदान प्रतिशत में 1.49 फीसदी की गिरावट देखी गई है, जहां पिछली बार कांग्रेस का बोर्ड बना था।
अलवर नगर निगम में भी स्थिति लगभग पिछली बार जैसी ही रही, जहां 65.75 प्रतिशत मतदान हुआ। अलवर में चुनाव के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों और भाजपा प्रत्याशी के बीच मारपीट की घटना भी सामने आई, जिसने स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा किया। वहीं, बीकानेर में मतदान प्रतिशत 66.93 से बढ़कर 68.91 प्रतिशत हो गया है, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
वसुंधरा राजे के क्षेत्र में बढ़ा उत्साह
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्र झालावाड़ में इस बार मतदान का प्रतिशत 79 तक पहुंच गया है, जो पिछली बार के मुकाबले 4 फीसदी अधिक है। जानकारों का कहना है कि बढ़ता मतदान प्रतिशत यहां पुराने चुनावी ट्रेंड के बरकरार रहने का संकेत हो सकता है। वहीं, नागौर में भी मतदान में बढ़ोतरी देखी गई है, जहां पिछली बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।
झुंझुनूं में मतदान प्रतिशत में 2.01 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। यहां 2024 के उपचुनाव में पहली बार भाजपा का विधायक बनने के बाद निकाय चुनाव को एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। धौलपुर में स्थिति स्थिर बनी हुई है, जहां पिछली बार की तरह ही इस बार भी लगभग 74.63 प्रतिशत मतदान हुआ है।
विश्लेषकों की राय और आगे की स्थिति
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक महेश शर्मा के अनुसार, निकाय चुनावों में मतदान प्रतिशत का घटना या बढ़ना सीधे तौर पर नतीजों का संकेत नहीं होता। शहरी निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशियों का व्यक्तिगत प्रभाव अधिक मायने रखता है। कई बार मतदान में कमी मतदाताओं की उदासीनता को दर्शाती है, तो कहीं यह प्रत्याशियों के चयन से असंतोष का परिणाम भी हो सकती है।
भाजपा ने इन चुनावों में मुख्यमंत्री के रोड शो और माइक्रो-मैनेजमेंट के जरिए पूरी ताकत झोंक दी थी। अब मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है ताकि मतगणना के बाद जोड़-तोड़ की संभावनाओं को रोका जा सके। अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि प्रदेश के शहरी निकायों में सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!