राजस्थान हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बालिका गृह और नारी निकेतन में सुविधाओं का मांगा पूरा ब्योरा
Rajasthan High Court seeks detailed report on facilities in Balika Grih and Nari Niketan. राजस्थान हाईकोर्ट ने बालिका गृह, नारी निकेतन, बाल गृह और फोस्टर होम में रहने वाले बच्चों व महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में सीसीटीवी कैमरे, पावर बैकअप, चिकित्सा सुविधा, वाटर प्यूरीफायर, भोजन के उपकरण, अग्निशमन व्यवस्था, कपड़े और टॉयलेट्री सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी मांगी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के बालिका गृहों, नारी निकेतन, बाल गृहों और फोस्टर होम में रहने वाले बच्चों तथा महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर अत्यंत गंभीर रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने इन संस्थानों की कार्यप्रणाली और वहां मौजूद बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुविधाओं और सुरक्षा मानकों पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इन संस्थानों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अधिकारियों से एक शपथ-पत्र के माध्यम से सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता, पावर बैकअप की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, वाटर प्यूरीफायर की व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की जांच रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा, वहां रहने वालों को दिए जाने वाले भोजन के उपकरण, कपड़ों की गुणवत्ता और टॉयलेट्री जैसी बुनियादी जरूरतों के बारे में भी ब्योरा तलब किया गया है।
न्यायालय ने इन संस्थानों में कार्यरत मानव संसाधन पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए सफाईकर्मियों, रसोइयों और चौकीदारों की तैनाती का पूरा विवरण मांगा है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि संस्थानों में पर्याप्त स्टाफ मौजूद हो ताकि बच्चों और महिलाओं की देखभाल में कोई कमी न रहे।
शिक्षा, प्रशिक्षण और दान का हिसाब-किताब
कोर्ट ने केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित न रहकर बच्चों के भविष्य और उनके कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया है। खंडपीठ ने संस्थानों में दी जा रही व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षकों की योग्यता और उनके नामों की सूची मांगी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि बच्चों की नियमित स्कूली शिक्षा के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं और उन्हें किन स्कूलों में भेजा जा रहा है।
एक महत्वपूर्ण निर्देश में अदालत ने संस्थानों को मिलने वाले व्यक्तिगत दान का ब्योरा भी मांगा है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है ताकि यह पता चल सके कि प्राप्त दान का उपयोग किस प्रकार और किन कार्यों में किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे में सुधार और भविष्य की कार्ययोजना
अदालत ने संस्थानों में जगह की कमी और कमरों के विस्तार की आवश्यकता पर भी चर्चा की। खंडपीठ ने राज्य सरकार से पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों के निर्माण की प्रस्तावित योजना की जानकारी मांगी है। यदि किसी संस्थान में जगह कम है या सुविधाएं अपर्याप्त हैं, तो कोर्ट ने सरकार को बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 अगस्त के लिए निर्धारित की है। उम्मीद की जा रही है कि तब तक संबंधित विभाग सभी आवश्यक जानकारी और शपथ-पत्र के साथ अपना पक्ष रखेंगे ताकि इन संस्थानों में रहने वाले लोगों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
