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राजस्थान निकाय चुनाव: 31 अगस्त की डेडलाइन सिर पर, भाजपा-कांग्रेस में टिकटों को लेकर मंथन तेज

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है, लेकिन अंतिम तारीख नजदीक आने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अब तक अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

29 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान निकाय चुनाव: 31 अगस्त की डेडलाइन सिर पर, भाजपा-कांग्रेस में टिकटों को लेकर मंथन तेज
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नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक, दलों में बढ़ी हलचल

राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित है, लेकिन इस समय सीमा के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद प्रमुख राजनीतिक दलों, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। इस देरी के कारण टिकट के दावेदारों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

दोनों ही दल इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। चुनाव की तारीखें नजदीक आने के साथ ही पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर तेज हो गया है। मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्याशियों के चयन में किसी भी प्रकार की आंतरिक कलह या बगावत को जन्म न दिया जाए, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

भाजपा की रणनीति और मंथन का दौर

भाजपा ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर अपनी कवायद तेज कर दी है। शनिवार को जयपुर स्थित प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें विशेष रूप से जयपुर और भरतपुर संभाग के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और चुनाव प्रभारी शामिल होंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन-स्तरीय रायशुमारी की प्रक्रिया अपना रही है। स्थानीय संगठन की रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों का फीडबैक और प्रभारियों के आकलन के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि कई सीटों पर नामों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन पार्टी ने अभी तक आधिकारिक घोषणा से परहेज किया है।

बगावत रोकने के लिए नया फॉर्मूला

इस बार निकाय चुनावों में भाजपा एक नई रणनीति पर विचार कर रही है। चर्चा है कि पार्टी सार्वजनिक रूप से प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बजाय सीधे जिला कार्यालयों के माध्यम से प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह (सिंबल) आवंटित कर सकती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन विवादों को टालना है जो सूची जारी होने के बाद असंतुष्ट नेताओं के विरोध के रूप में सामने आते हैं।

कांग्रेस की स्थिति भी इससे भिन्न नहीं है। कांग्रेस भी उन सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है जहां दावेदारों की संख्या अधिक है और गुटबाजी की संभावना बनी हुई है। कांग्रेस भी विवादित सीटों पर भाजपा की तरह ही गोपनीय तरीके से सिंबल वितरण करने की रणनीति अपना सकती है ताकि अंतिम समय तक बगावत को नियंत्रित रखा जा सके।

चुनावी समीकरण और भविष्य की राह

निकाय चुनाव स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 31 अगस्त की नामांकन तिथि तक दोनों ही दलों के लिए समय बहुत कम बचा है। ऐसे में अगले कुछ घंटों में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा या सिंबल वितरण की प्रक्रिया में तेजी आना तय है। कार्यकर्ताओं की नजरें अब पार्टी आलाकमान के अंतिम फैसलों पर टिकी हैं।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सा दल अपनी रणनीति में कितना सफल रहा है। फिलहाल, दोनों ही प्रमुख दल अपनी संगठनात्मक मजबूती और एकजुटता का प्रदर्शन करने की कोशिश में जुटे हैं ताकि चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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