किसान उत्पादक संगठनों के कामकाज पर उठे सवाल: 70% CBBO की कार्यप्रणाली की जांच की मांग
Sai Reddy slams corrupt CBBOs over FPO mismanagement, demands central government inquiry and action. देश में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को खड़ा करने और उन्हें मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाले करीब 70% क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) के कामकाज पर भारतीय किसान संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साईं रेड्डी ने कहा कि देशभर में करीब 1000 CBBO हैं, लेकिन इनमें से 70% में ठीक से काम नहीं हुआ।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

FPO के संचालन में CBBO की भूमिका पर गंभीर सवाल
देशभर में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को सशक्त बनाने के लिए नियुक्त क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (CBBO) की कार्यप्रणाली पर भारतीय किसान संघ ने गंभीर चिंता जताई है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साईं रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि देश में कार्यरत लगभग 1000 CBBO में से करीब 70 प्रतिशत संस्थाओं ने अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संस्थाओं ने सरकारी धन का उपयोग तो किया, लेकिन किसानों को व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के अपेक्षित परिणाम नहीं दिए।
साईं रेड्डी ने बताया कि भारतीय किसान संघ ने इस मामले की आंतरिक जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की थी। इस अध्ययन में यह बात सामने आई कि अधिकांश CBBO ने FPO को मजबूत करने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया। संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जिन संस्थाओं का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
कार्यकाल समाप्ति के बाद FPO के भविष्य पर संकट
CBBO का अनुबंध आमतौर पर पांच वर्षों का होता है, जो अब कई संस्थाओं के लिए समाप्त हो चुका है। रेड्डी ने सवाल उठाया कि इन संस्थाओं को आवंटित राशि मिलने के बाद, अब उनके हटने पर FPO का भविष्य कौन संभालेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में FPO को सहयोग देने के लिए स्थानीय स्तर पर कलेक्टर, उद्यानिकी और कृषि विभाग के अधिकारियों की निगरानी में एक नई व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए ताकि किसानों को निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहे।
भारतीय किसान संघ ने FPO के सफल संचालन के लिए 'पांच पांडव' मॉडल का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अध्यक्ष, सीईओ और निदेशकों सहित पांच प्रमुख पदाधिकारियों की एक ईमानदार और कुशल टीम का होना अनिवार्य है। संघ का मानना है कि यदि यह टीम निष्ठा से काम करे, तो FPO किसानों के लिए एक शक्तिशाली आर्थिक मंच साबित हो सकते हैं।
सेवा भाव से काम करेगा किसान संघ
साईं रेड्डी ने घोषणा की कि जिन कार्यों को करने में CBBO विफल रहे हैं, उन्हें अब भारतीय किसान संघ सेवा भाव से पूरा करेगा। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर 'माही फाउंडेशन' का गठन किया गया है। यह फाउंडेशन राज्यों में फेडरेशन बनाकर FPO को प्रशिक्षण, विपणन और प्रबंधन संबंधी सहायता प्रदान करेगा, ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
इसके अतिरिक्त, संघ ने खाद और बीज की किल्लत को दूर करने के लिए FPO को इनके वितरण का लाइसेंस देने की मांग की है। रेड्डी ने कहा कि यदि FPO और पैक्स के माध्यम से खाद-बीज का वितरण किया जाए, तो गांव स्तर पर किसानों को समय पर सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। इस संबंध में केंद्र सरकार को सुझाव भेजे गए हैं और कई राज्यों ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
FPO और CBBO की भूमिका
FPO का मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों को संगठित कर उन्हें सामूहिक खरीद, भंडारण और विपणन की सुविधा प्रदान करना है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। वहीं, CBBO को इन संगठनों के गठन, पंजीयन और शुरुआती वर्षों में उन्हें बाजार से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भारतीय किसान संघ के इन आरोपों ने कृषि क्षेत्र में इन संस्थाओं की जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
