ब्रेकिंग
गोरखपुर: नौकरी का झांसा देकर युवक के नाम पर खोला बैंक खाता, 1.75 करोड़ का हुआ संदिग्ध लेनदेनमंडला में पैसों के लेनदेन को लेकर खूनी संघर्ष, उधारी मांगने पर युवक पर चाकू से जानलेवा हमलापटना में डेंगू का प्रकोप: 23 दिनों में 140 नए मामले, अस्पतालों में अलर्टबाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच सुलह, अयोध्या के संतों की पहल लाई रंगग्वालियर में 70 फर्जी पासपोर्ट का भंडाफोड़: एसटीएफ ने आरोपी गया प्रसाद को किया गिरफ्तारबदायूं: अफीम तस्करों को 8 लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप, एक सिपाही लाइन हाजिरऑनलाइन कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, याचिका पर सुनवाई से किया इनकारभोपाल: ऑटो चालक ने जहर खाकर दी जान, 15 हजार रुपये के लेनदेन और प्रताड़ना का आरोप
गोरखपुर: नौकरी का झांसा देकर युवक के नाम पर खोला बैंक खाता, 1.75 करोड़ का हुआ संदिग्ध लेनदेनमंडला में पैसों के लेनदेन को लेकर खूनी संघर्ष, उधारी मांगने पर युवक पर चाकू से जानलेवा हमलापटना में डेंगू का प्रकोप: 23 दिनों में 140 नए मामले, अस्पतालों में अलर्टबाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच सुलह, अयोध्या के संतों की पहल लाई रंगग्वालियर में 70 फर्जी पासपोर्ट का भंडाफोड़: एसटीएफ ने आरोपी गया प्रसाद को किया गिरफ्तारबदायूं: अफीम तस्करों को 8 लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप, एक सिपाही लाइन हाजिरऑनलाइन कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, याचिका पर सुनवाई से किया इनकारभोपाल: ऑटो चालक ने जहर खाकर दी जान, 15 हजार रुपये के लेनदेन और प्रताड़ना का आरोप

प्रयागराज: साइबर फ्रॉड की रकम रिलीज कराने के नाम पर इंस्पेक्टर और सिपाही ने वसूले 4.20 लाख, केस दर्ज

पीड़िता की शिकायत पर प्रारंभिक जांच कराई गई और इसके बाद सोमवार को सिविल लाइंस थाने में देानों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। आरोपी इंस्पेक्टर ओम नारायण गौतम पूर्व में साइबर थाने के प्रभारी रह चुके हैं जबकि उनके साथ नामजद सिपाही अभिषेक भी उसी थाने में तैनात है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
प्रयागराज: साइबर फ्रॉड की रकम रिलीज कराने के नाम पर इंस्पेक्टर और सिपाही ने वसूले 4.20 लाख, केस दर्ज
मूल स्रोत

साइबर फ्रॉड के मामले में घूसखोरी का गंभीर आरोप

प्रयागराज में साइबर क्राइम से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान पुलिस विभाग को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। साइबर थाने में तैनात रहे तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओम नारायण गौतम और सिपाही अभिषेक कुमार पर एक महिला कांस्टेबल से 4.20 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा है। यह रकम कथित तौर पर साइबर फ्रॉड में फ्रीज हुई धनराशि को रिलीज कराने के एवज में मांगी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

पीड़िता महिला कांस्टेबल के अनुसार, उसके भाई के साथ करीब 60 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट फ्रॉड हुआ था, जिसे लेकर 28 मई 2025 को साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत के बाद करीब 33 लाख रुपये फ्रीज हुए थे। कोर्ट के आदेश के बावजूद जब यह रकम रिलीज करने में देरी की गई, तो विवेचक ओम नारायण गौतम ने कथित तौर पर 20 प्रतिशत कमीशन की मांग की। आरोपी ने तर्क दिया कि यह पैसा बैंक अधिकारियों को मैनेज करने और जांच के सिलसिले में अन्य राज्यों में जाने के खर्च के लिए आवश्यक है।

अलग-अलग किस्तों में ली गई रिश्वत

महिला कांस्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने मजबूरी में कर्ज लेकर यह रकम चुकाई। उसने हीरा हलवाई चौराहा, मनमोहन पार्क और रिजर्व पुलिस लाइन के पास अलग-अलग तारीखों पर कुल 4.20 लाख रुपये नकद दिए। सिपाही अभिषेक कुमार पर भी आरोप है कि उसने विवेचक का हिस्सा लेने के साथ-साथ ऑनलाइन विवेचना के नाम पर अपनी भूमिका निभाई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर ने अपनी बेटी की नीट कोचिंग के लिए उसके भाई के माध्यम से अनएकेडमी संस्थान से मुफ्त कोर्स और शिक्षण सामग्री भी हासिल की।

जब महिला कांस्टेबल ने इस घूसखोरी का विरोध किया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने उसके भाई के खाते में अवैध रकम भेजकर उसे ही मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके अलावा, केस डायरी में बैकडेट में गलत प्रविष्टियां करने और महिला कांस्टेबल के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़िता ने इन सभी दावों के समर्थन में व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और बैंक से पैसे निकालने के साक्ष्य पुलिस को सौंपे हैं।

प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर

महिला कांस्टेबल ने 23 जून 2026 को पुलिस उपायुक्त (अपराध) से इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद मामले की प्रारंभिक जांच शुरू हुई। दो महीने से अधिक समय तक चली जांच के दौरान आरोपी इंस्पेक्टर ने अपना बयान दर्ज नहीं कराया। इस बीच, मुकदमे की विवेचना दूसरे अधिकारी को स्थानांतरित कर दी गई। हालांकि, एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी साइबर फ्रॉड के अधिकांश आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने पुष्टि की है कि महिला कांस्टेबल की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब सौंपे गए डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी तथ्यों की गहन जांच कर रही है। इस मामले ने साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेषकर केस डायरी में छेड़छाड़ और ऑनलाइन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें