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प्रयागराज आधार कार्ड फर्जीवाड़ा: सिस्टम में सेंध लगाने वाला एक और ऑपरेटर गिरफ्तार

Prayagraj Aadhaar card scam update, fake ID activation network busted by police. प्रयागराज में फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और आधार अपडेट करने वाले नेटवर्क के एक और मेंबर को गिरफ्तार किया गया है। वह पहले बैंक में यूआईडीएआई ऑपरेटर का काम करता था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

2 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें 1.4K
प्रयागराज आधार कार्ड फर्जीवाड़ा: सिस्टम में सेंध लगाने वाला एक और ऑपरेटर गिरफ्तार
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आधार सिस्टम की सुरक्षा में सेंधमारी का मामला

प्रयागराज में आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो पूर्व में बैंक में आधार ऑपरेटर के तौर पर काम कर चुका था। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में पकड़े गए कुल आरोपियों की संख्या चार हो गई है। इससे पहले तीन अन्य लोगों को पुलिस जेल भेज चुकी है।

पकड़ा गया आरोपी संजूले गुप्ता मूल रूप से प्रतापगढ़ के कुंडा का निवासी है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उसने एक बैंक में यूआईडीएआई ऑपरेटर के रूप में काम शुरू किया था। जांच में सामने आया है कि जब बैंक का संबंधित कंपनी के साथ अनुबंध समाप्त हुआ, तो कई ऑपरेटरों की यूजर आईडी बंद कर दी गई थी। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने गलत रास्ते अपनाए।

तकनीक का दुरुपयोग और अवैध सक्रियण

पूछताछ में पता चला है कि आरोपी क्लोनिंग और बाईपास तकनीक का सहारा लेते थे। बंद हो चुकी यूजर आईडी और पिन को दोबारा सक्रिय करने के लिए वे एनीडेस्क (AnyDesk) जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे। इस तकनीक के जरिए वे यूआईडीएआई के सिस्टम में अनाधिकृत रूप से लॉगिन करते थे, जिससे सुरक्षा घेरा पूरी तरह से टूट जाता था।

इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद संगठित था। एक यूजर आईडी को सक्रिय करने के लिए वे प्रति सेशन 5 हजार रुपये वसूलते थे। इसके अलावा, प्रत्येक आधार नामांकन या अपडेट के लिए 250 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था। ऑपरेटर व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी एनीडेस्क आईडी साझा करते थे, जिसके बाद गिरोह के सदस्य रिमोट एक्सेस लेकर सिस्टम में लॉगिन कर देते थे।

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लवकुश यादव और परमात्मा शरण उर्फ विवेक शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इनमें तीन लैपटॉप, तीन एंड्रॉयड मोबाइल, एक आईफोन, चार सिम कार्ड, फिंगर स्कैनर, हार्ड डिस्क और एसएसडी शामिल हैं। इसके अलावा, पुलिस को बड़ी संख्या में चेकबुक, पासबुक और हिसाब-किताब की बही भी मिली है।

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे 2020 से एक निजी कंपनी के जरिए फ्रेंचाइजी चलाकर विभिन्न बैंकों में ऑपरेटरों की नियुक्ति करवाते थे। अनुबंध खत्म होने के बाद जब उनकी आईडी बंद हुई, तो वे ऐसे लोगों के संपर्क में आए जो क्लोनिंग के जरिए सिस्टम को बाईपास करने में माहिर थे।

आगे की जांच और सुरक्षा चुनौतियां

यह मामला आधार कार्ड जैसी संवेदनशील पहचान प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के तार और कहां तक जुड़े हैं और क्या इसमें कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आधार सिस्टम की सुरक्षा को लेकर यूआईडीएआई के साथ भी समन्वय किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की सेंधमारी को रोका जा सके। फिलहाल, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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