प्रतापगढ़ में बालश्रम का खुलासा: भेड़ चराते मिले 3 नाबालिग बच्चे, बंधुआ मजदूरी से कराया गया मुक्त
प्रशासन, पुलिस और गायत्री सेवा संस्थान ने मिलकर तीन नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया। जांच में पता चला कि तीनों बच्चे राजसमंद, सिरोही और चित्तौड़गढ़ जिलों के रहने वाले हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

धमोतर थाना क्षेत्र में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में बालश्रम और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान के तहत तीन नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया है। धमोतर थाना क्षेत्र में हुई इस संयुक्त कार्रवाई में स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और गायत्री सेवा संस्थान की टीम शामिल रही। मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र नाबालिग बताई जा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में भेड़ चराने का काम कर रहे थे।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ये बच्चे प्रतापगढ़ के स्थानीय निवासी नहीं हैं, बल्कि ये राजस्थान के ही राजसमंद, सिरोही और चित्तौड़गढ़ जिलों से संबंधित हैं। इन बच्चों को उनके घरों से दूर लाकर मजदूरी के काम में झोंक दिया गया था, जो बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
फील्ड विजिट के दौरान सामने आया मामला
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल अपने नियमित फील्ड विजिट पर थे। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे भेड़ों के तीन अलग-अलग झुंड देखे, जिन्हें बहुत कम उम्र के बच्चे नियंत्रित कर रहे थे। बच्चों की स्थिति और उनके काम को देखकर समन्वयक को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी।
पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर बच्चों से पूछताछ की। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें एडवांस पैसे देकर काम पर रखा गया था। सूत्रों के अनुसार, इन बच्चों को राज्य से बाहर ले जाकर मजदूरी कराने की योजना बनाई जा रही थी, जो मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी की श्रेणी में आता है। पुलिस ने इस मामले में तीन संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
बाल कल्याण समिति की देखरेख में बच्चे
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल कल्याण पुलिस अधिकारी रेखा माली ने बच्चों के विस्तृत बयान दर्ज किए। इसके बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति के आदेशानुसार, इन बच्चों को फिलहाल सुरक्षित शेल्टर होम में रखा गया है, जहां उन्हें उचित देखभाल और सुरक्षा प्रदान की जा रही है। प्रशासन ने इन बच्चों को बंधुआ मुक्ति प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए हैं।
यह घटना क्षेत्र में बाल मजदूरी के बढ़ते खतरों की ओर इशारा करती है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन बच्चों को किन परिस्थितियों में और किन लोगों के माध्यम से यहां तक लाया गया था। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पूर्व में भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
प्रतापगढ़ में यह पहली बार नहीं है जब बालश्रम का ऐसा मामला सामने आया हो। लगभग एक साल पहले भी स्वतंत्रता दिवस के आसपास इसी तरह की एक कार्रवाई में तीन बच्चों को गड़रियों के चंगुल से मुक्त कराया गया था। उस समय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राजस्थान राज्य बाल आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया था, जिसके बाद जनजाति क्षेत्रों से बच्चों के पलायन और मजदूरी पर कुछ समय के लिए लगाम लगी थी।
संस्थान के प्रतिनिधियों का कहना है कि एक साल बाद फिर से इसी तरह की घटनाओं का दोहराया जाना चिंताजनक है। प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने वाले गिरोहों पर सख्त नकेल कसी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!