पटना की सड़कों पर अब AI से लैस 'नगर नेत्रा' रखेंगे नजर, जानें क्या है नई तकनीक
शहर की सफाई, सड़कों और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पटना में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पटना स्मार्ट सिटी की ओर से सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार की राजधानी पटना को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों की स्थिति और नागरिक सुविधाओं की निगरानी के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाएगा। पटना स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 'सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट' को मंजूरी दे दी गई है, जिसके माध्यम से शहर की व्यवस्थाओं को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा।
क्या है 'नगर नेत्रा' ई-स्कूटर परियोजना?
इस परियोजना के तहत पटना नगर निगम के 75 वार्डों की निगरानी के लिए 19 विशेष ई-स्कूटर तैनात किए जाएंगे। इन ई-स्कूटर्स को 'नगर नेत्रा' नाम दिया गया है। योजना के अनुसार, हर चार वार्डों पर एक ई-स्कूटर की जिम्मेदारी होगी, जो लगातार गलियों और सड़कों का चक्कर लगाकर वहां की वास्तविक स्थिति का डेटा जुटाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया सितंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।
तकनीकी रूप से इन ई-स्कूटर्स में 4K रेजोल्यूशन वाले स्मार्ट डैशकैम और GPS सिस्टम लगाए जाएंगे। ये कैमरे 110 डिग्री वाइड एंगल के साथ सड़कों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। इसके बाद, AI और मशीन लर्निंग तकनीक इन दृश्यों का विश्लेषण करेगी ताकि शहर की समस्याओं को तुरंत पहचाना जा सके।
कैसे काम करेगा AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम?
यह सिस्टम सड़क पर फैले कचरे, गड्ढों, खुले मैनहोल, खराब स्ट्रीट लाइट, अवैध अतिक्रमण, आवारा मवेशियों और अवैध होर्डिंग्स जैसी समस्याओं को स्वतः पहचानने में सक्षम होगा। गांधी मैदान स्थित एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC) में एक सेंट्रल सिविक सर्विसेज ऑपरेशंस सेंटर स्थापित किया जाएगा। ई-स्कूटर से प्राप्त लाइव डेटा सीधे इसी सेंटर में पहुंचेगा, जहां से संबंधित अधिकारियों को मोबाइल ऐप के जरिए तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।
इस निगरानी प्रक्रिया के तहत प्रत्येक वार्ड की सड़कों की स्क्रीनिंग सप्ताह में दो बार अनिवार्य रूप से की जाएगी। इसके लिए एक व्यवस्थित टाइमटेबल तैयार किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी समस्या के समाधान में देरी न हो। यह सिस्टम यह भी रिकॉर्ड करेगा कि कोई समस्या कितने समय से बनी हुई है और उस पर संबंधित विभाग ने क्या कार्रवाई की है।
ई-स्कूटर की क्षमता और भविष्य की योजनाएं
इन ई-स्कूटर्स को चलाने के लिए 3 किलोवाट प्रति घंटे की क्षमता वाली लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जाएगा। एक बार फुल चार्ज होने पर ये स्कूटर 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकेंगे। इनके चार्जिंग के लिए ICCC या अन्य निर्धारित स्थानों पर विशेष हब बनाए जाएंगे। यह पूरी व्यवस्था न केवल समस्याओं को जल्दी पकड़ने में मदद करेगी, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगी।
नगर विकास विभाग ने इस परियोजना को फिलहाल पटना के लिए मंजूरी दी है। यदि यह मॉडल पटना में सफल साबित होता है, तो इसे बिहार के अन्य प्रमुख शहरों जैसे बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस पहल से भविष्य में बिहार के शहरी बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!