पंचकूला: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग महिला से 16 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार
Panchkula police nab 2 fraudsters in Rs 16 lakh digital arrest scam targeting elderly woman. पंचकूला पुलिस ने एक बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट करने के नाम पर 16 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले एक साइबर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के पंचकूला में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग महिला को अपना निशाना बनाते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 16 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इस मामले में पंचकूला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के सरगना की तलाश में जुटी है।
खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर फैलाया डर
पीड़ित महिला ने साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। आरोपी ने महिला को डराया कि उनके नाम से ईरान भेजे जा रहे एक पार्सल में प्रतिबंधित ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट और अवैध बैंक कार्ड बरामद हुए हैं। इस सूचना से महिला घबरा गई और ठगों ने उसे मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी।
ठगों ने महिला को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें कई दिनों तक घर के एक कमरे में 'डिजिटल अरेस्ट' रखा गया। इस दौरान उन्हें किसी से भी संपर्क करने से मना कर दिया गया। जेल जाने और सामाजिक बदनामी के डर से घबराई बुजुर्ग महिला ने आरोपियों के बताए अनुसार अलग-अलग बैंक खातों में कुल 16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बैंक खातों की जांच से खुला जाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम में से 5 लाख रुपये बीकानेर निवासी गोपाल सारन के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि गोपाल ने पैसों के लालच में अपना बैंक खाता प्रमोद गोदारा नामक व्यक्ति को बेच दिया था।
पुलिस ने जाल बिछाकर बीकानेर से गोपाल सारन (26) और प्रमोद गोदारा (23) को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया है। साइबर थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह ने बताया कि इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।
पुलिस की सतर्कता और आगे की कार्रवाई
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह है जो देश भर में लोगों को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर ठग रहा है। पुलिस अब उन अन्य संदिग्ध खाताधारकों की पहचान कर रही है, जिनके खातों में शेष राशि ट्रांसफर की गई थी। मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं और न ही किसी के दबाव में आकर अपनी निजी जानकारी या बैंक विवरण साझा करें। यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराता है, तो तुरंत नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है, यह केवल साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को लूटने का एक नया तरीका है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ानटिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
