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राजस्थान में ओवैसी और हनुमान बेनीवाल का नया गठबंधन, भाजपा-कांग्रेस को चुनौती देने की तैयारी

ओवैसी ने इसे राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प की शुरुआत बताया, जबकि हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जयपुर की धरती से नई राजनीति का आगाज हो रहा है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

7 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
राजस्थान में ओवैसी और हनुमान बेनीवाल का नया गठबंधन, भाजपा-कांग्रेस को चुनौती देने की तैयारी
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जयपुर से शुरू हुआ नया सियासी समीकरण

राजस्थान की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ता नजर आ रहा है। जयपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने एक साझा मंच साझा कर राज्य में भाजपा और कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन केवल आगामी निकाय चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे भविष्य के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

निकाय चुनाव के दौरान भट्टा बस्ती में आयोजित जनसभा में दोनों नेताओं की उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। ओवैसी ने कहा कि राजस्थान की जनता लंबे समय से केवल दो दलों के बीच सिमटी हुई राजनीति देख रही है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। वहीं, हनुमान बेनीवाल ने इसे राज्य की राजनीति में एक नई शुरुआत करार दिया है।

भाजपा-कांग्रेस पर तीखे हमले

असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी केवल हिंदू-मुस्लिम के नाम पर समाज में तनाव पैदा कर रही है। उन्होंने राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की स्थिति और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने जनता से अपील की कि जहां आरएलपी के उम्मीदवार मैदान में हैं, वहां उन्हें समर्थन देकर एक नई राजनीतिक ताकत को आगे बढ़ाएं।

हनुमान बेनीवाल ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पेपर लीक, किसानों की समस्याओं और अग्निवीर योजना जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जाट और मुस्लिम समुदायों का यह राजनीतिक मेल राज्य की तस्वीर बदलने में सक्षम है। बेनीवाल के अनुसार, यह गठबंधन केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

निकाय चुनाव पहली बड़ी परीक्षा

आगामी 11 सितंबर को होने वाले निकाय चुनाव इस गठबंधन के लिए पहली अग्निपरीक्षा साबित होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का मुस्लिम वोट बैंक और बेनीवाल का जाट व किसान समुदाय पर प्रभाव यदि एक साथ आता है, तो यह कई सीटों पर पारंपरिक समीकरणों को बिगाड़ सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है।

दोनों दलों के नेताओं के बयानों से संकेत मिलते हैं कि वे निकाय चुनाव के बाद भी इस साझेदारी को जारी रखने की योजना बना रहे हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो राजस्थान में आने वाले समय में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

फिलहाल, जयपुर से शुरू हुई यह सियासी दोस्ती विधानसभा चुनाव तक कितनी मजबूत बनी रहती है, यह भविष्य के घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। राज्य की जनता अब इस नए विकल्प को किस नजरिए से देखती है, यह चुनावी नतीजों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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