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दिव्यांगजनों के लिए उत्तर मध्य रेलवे का बड़ा कदम: 400 को मिला रोजगार, 100 युवाओं को मिल रही ट्रेनिंग

उत्तर मध्य रेलवे ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने संविदा के आधार पर करीब 400 दिव्यांगों को रोजगार उपलब्ध कराया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

26 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
दिव्यांगजनों के लिए उत्तर मध्य रेलवे का बड़ा कदम: 400 को मिला रोजगार, 100 युवाओं को मिल रही ट्रेनिंग
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दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में रेलवे की नई पहल

उत्तर मध्य रेलवे ने दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय अभियान चलाया है। इस पहल के तहत रेलवे ने संविदा के आधार पर करीब 400 दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। इसके साथ ही, कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए 100 युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि दिव्यांगजन समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें समान अवसर प्रदान करना विभाग की प्राथमिकता है। इस अभियान के माध्यम से न केवल उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है। रेलवे के विभिन्न मंडलों में इन लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार कार्य सौंपा गया है।

विभिन्न क्षेत्रों में मिल रहे रोजगार के अवसर

सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा ने जानकारी दी कि महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के दिशा-निर्देशों पर इस वर्ष की शुरुआत से ही तीनों मंडलों में दिव्यांगजनों को रोजगार देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी। इन दिव्यांगजनों को ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) ऑपरेटर, स्टेशन उद्घोषक, डेटा एंट्री ऑपरेटर और 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' स्टॉल संचालक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात किया गया है।

यह रोजगार अभियान प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडल के साथ-साथ रेलवे की विभिन्न वर्कशॉप और प्रोडक्शन यूनिट में भी प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रयागराज मंडल में लगभग 200, झांसी में 100 और आगरा मंडल में 63 दिव्यांग कर्मचारी वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी कर्मचारी ग्राहक सेवा और परिचालन संबंधी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

कौशल विकास और भविष्य की योजनाएं

केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि रेलवे दिव्यांग युवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। 'एक्ट अप्रेंटिसशिप स्कीम' के अंतर्गत 100 दिव्यांग युवाओं को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है ताकि वे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर करियर विकल्प चुन सकें।

वर्तमान में उत्तर मध्य रेलवे के स्थायी कैडर में कुल 784 दिव्यांग कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें साल 2025-26 के दौरान भर्ती किए गए 15 नए कर्मचारी भी शामिल हैं। रेलवे प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आने वाले समय में दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे और उनके कौशल विकास के लिए और अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस पूरी पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है। रेलवे की यह कोशिश न केवल विभागीय कार्यकुशलता को बढ़ा रही है, बल्कि एक समावेशी कार्य संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है। आने वाले दिनों में इस योजना के विस्तार की प्रबल संभावना है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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