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सिंध नदी में अवैध रेत खनन पर एनजीटी सख्त, जांच के लिए बनाई गई संयुक्त समिति

NGT orders joint committee probe into illegal sand mining in Sindh river. मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रूप से मशीनों के जरिए होने वाले रेत खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के न्यायिक सदस्य शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पी

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor in chief

7 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें 542
सिंध नदी में अवैध रेत खनन पर एनजीटी सख्त, जांच के लिए बनाई गई संयुक्त समिति
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सिंध नदी में अवैध खनन: एनजीटी ने लिया संज्ञान

मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों से होकर बहने वाली सिंध नदी में मशीनों के जरिए किए जा रहे अवैध रेत खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

न्यायिक सदस्य शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया है। यह समिति जमीनी स्तर पर हो रहे अवैध खनन की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करेगी। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस समिति के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है।

छह सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

एनजीटी द्वारा गठित इस संयुक्त समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग के सचिव द्वारा नामित प्रतिनिधि और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिए हैं कि समिति प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करे और अवैध खनन के दावों की सत्यता की जांच करे। समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का विवरण सौंपना होगा।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि सिंध नदी में भारी मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग उपकरणों का उपयोग करके मुख्य धारा से रेत निकाली जा रही है। यह अवैध कारोबार भिंड के 18 और दतिया के 6 गांवों में सक्रिय है। आरोप है कि बिना किसी वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) या पर्यावरण मंजूरी के निकाली गई रेत को बिना ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है।

प्रशासनिक विफलता और वन्यजीवों पर खतरा

सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि राज्य सरकार पूर्व में एनजीटी द्वारा निर्धारित सुरक्षात्मक दिशा-निर्देशों को लागू करने में विफल रही है। नियमों के अनुसार जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन, नियमित निरीक्षण और वार्षिक पुनर्भरण अध्ययन अनिवार्य है, लेकिन इन प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। इसके अलावा, अवैध वाहनों पर भारी जुर्माना लगाने के निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा है।

सिंध नदी का यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि यह राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभ्यारण्य से जुड़ा हुआ है। अनियंत्रित खनन के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो रहा है और यह क्षेत्र घड़ियाल, मगरमच्छ, प्रवासी पक्षियों और दुर्लभ भारतीय फ्लैपशेल कछुओं के लिए खतरा बन गया है। खनन गतिविधियों से इन जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने की कगार पर है।

अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को

एनजीटी ने इस मामले को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर माना है। ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस बीच, अवैध खनन में पुलिस की कथित संलिप्तता को लेकर एक प्रारंभिक सतर्कता जांच भी शुरू की गई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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