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नरसिंहपुर: सरकारी स्कूल की बदहाली, एक कमरे में पांच कक्षाओं के बच्चे और परिसर में मिली शराब की बोतलें

नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा जनपद स्थित मेहरागांव के सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे स्कूल ठीक करो अभियान के तहत किए गए सोशल ऑडिट में स्कूल की बदहाली का खुलासा हुआ।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
नरसिंहपुर: सरकारी स्कूल की बदहाली, एक कमरे में पांच कक्षाओं के बच्चे और परिसर में मिली शराब की बोतलें
मूल स्रोत

मेहरागांव के सरकारी स्कूल में बदहाली की तस्वीर

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा जनपद अंतर्गत मेहरागांव स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की दयनीय स्थिति सामने आई है। एक सामाजिक संगठन द्वारा चलाए जा रहे 'स्कूल ठीक करो अभियान' के तहत किए गए सोशल ऑडिट में विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं की पोल खुल गई है। इस ऑडिट के दौरान स्कूल परिसर में न केवल अव्यवस्थाओं का अंबार मिला, बल्कि वहां की सुरक्षा और स्वच्छता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। विद्यालय में न तो पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न ही बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। कक्षा के भीतर बच्चों के बैठने के लिए बेंच, पंखे और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों का भी अता-पता नहीं है, जिससे विद्यार्थियों को भीषण गर्मी और असुविधा के बीच पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

एक ही कमरे में पांच कक्षाओं का संचालन

इस स्कूल की सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। एक ही छत के नीचे पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बिठाने से न केवल पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक साथ सभी कक्षाओं का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आती है।

विद्यालय परिसर के भीतर और आसपास फैली गंदगी ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ऑडिट टीम को स्कूल परिसर के बाहर गोबर का ढेर और मच्छरों का प्रकोप देखने को मिला, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। इससे भी अधिक आपत्तिजनक बात यह है कि स्कूल परिसर के अंदर शराब की खाली बोतलें पड़ी मिलीं, जो शैक्षणिक संस्थान की पवित्रता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

ग्रामीणों और संगठन की कड़ी नाराजगी

स्कूल में शराब की बोतलों का मिलना इस बात का संकेत है कि रात के समय विद्यालय परिसर का उपयोग असामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इस स्थिति से स्थानीय ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस माहौल के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल ऑडिट करने वाली टीम और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि स्कूल में बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाए, कक्षाओं के लिए अलग कमरों की व्यवस्था हो और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या स्थानीय स्तर पर स्कूल का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने कभी इन कमियों पर ध्यान नहीं दिया? फिलहाल, इस मामले के उजागर होने के बाद अब विभाग पर सुधार के लिए दबाव बढ़ गया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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