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नर्मदापुरम में किसानों का 11 घंटे चला संघर्ष, राष्ट्रगान और संवेदनशीलता से थमा टकराव

सीजेपी के प्रदर्शन की झलक भी देखने को मिली। जिसमें पुलिस बिना लाठी डंडे के खड़े नजर आई। बेरिकेड्स हटाने से रोकने पुलिस के करीब आने पर किसान राष्ट्रगान गाने लगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

28 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
नर्मदापुरम में किसानों का 11 घंटे चला संघर्ष, राष्ट्रगान और संवेदनशीलता से थमा टकराव
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मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने भोपाल कूच का आह्वान किया। मुख्यमंत्री आवास के घेराव के इरादे से निकले किसानों और जिला प्रशासन के बीच करीब 11 घंटे तक संघर्ष की स्थिति बनी रही। सुबह 9 बजे से शुरू हुआ यह प्रदर्शन देर शाम 7:30 बजे तक जारी रहा, जिसमें आक्रोश के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं के कई दृश्य देखने को मिले।

राष्ट्रगान से थमा पुलिस और किसानों का टकराव

प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने शहर से बाहर निकलने वाले रास्तों पर थ्री-लेयर बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब पुलिस बल बैरिकेड्स हटाने से रोकने के लिए किसानों के करीब पहुंचा, तो टकराव की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच किसानों ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के कदम थम गए। इस संयमित व्यवहार की चर्चा हर तरफ हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि हाल ही में अन्य राज्यों में हुए लाठीचार्ज की घटनाओं के बाद प्रशासन को विशेष संयम बरतने के निर्देश दिए गए थे, जिसके चलते पुलिसकर्मी बिना लाठी-डंडे के तैनात रहे।

प्रदर्शन के दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब एक किसान अपनी फसल (मूंग) की बिक्री की समस्या को लेकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसने एसपी साईं कृष्णा एस थोटा के पैर पकड़कर अपनी व्यथा सुनाई। इस पर एसपी ने किसान को उठाकर गले से लगा लिया और हाथ जोड़कर उसे शांत कराया। एसपी का यह संवेदनशील व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

धार्मिक आयोजन और एकजुटता की मिसाल

सेठानी घाट पर नर्मदा पूजन के बाद किसानों ने सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया और सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन किया। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। प्रदर्शन में शामिल किसानों की एकजुटता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टिगरिया गांव के युवाओं ने अपने निजी खर्च से आरओ पानी की व्यवस्था की और ट्रैक्टर-ट्रॉली में पानी के कैन भरकर पैदल चल रहे साथियों की प्यास बुझाई।

प्रशासनिक स्तर पर भी संवेदनशीलता दिखाई दी। जब किसानों की रैली के दौरान बुधनी की ओर से एक एंबुलेंस आई, जिसमें एक गंभीर मरीज सवार था, तो कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसपी ने तुरंत बैरिकेडिंग हटवाने के निर्देश दिए। मात्र 15 सेकंड के भीतर रास्ता साफ कर एंबुलेंस को सुरक्षित निकाल दिया गया, जिससे एक बड़ी आपातकालीन स्थिति टल गई।

प्रशासनिक संवाद और आगे की स्थिति

कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने पूरे दिन मौके पर मौजूद रहकर किसानों से लगातार संवाद बनाए रखा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। हालांकि, किसान अपनी मांगों को लेकर भोपाल जाने की जिद पर अड़े रहे। प्रशासन की भारी तैनाती के बावजूद, पूरे दिन किसी भी प्रकार की हिंसा या लाठीचार्ज की घटना नहीं हुई।

नर्मदापुरम में हुआ यह प्रदर्शन आने वाले समय में किसान आंदोलनों के लिए एक अलग मिसाल बन गया है। जहां एक ओर किसान अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का संयमित रवैया और पुलिस का मानवीय चेहरा इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य केंद्र रहा। अब देखना यह होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आगे की रणनीति क्या रहती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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