एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी का बंटवारा पहुंचा हाईकोर्ट, जबलपुर बनाम उज्जैन संभागों के आवंटन पर सरकार से मांगा जवाब
जबलपुर में स्थित एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखण्डन में नाइंसाफी का आरोप लगाकर दायर याचिका को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले पर राज्य सरकार और प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्तों में उनका जवाब मांगा है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन को हाईकोर्ट में चुनौती
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के हालिया पुनर्गठन और विभाजन का मामला अब कानूनी मोड़ पर आ गया है। इस विभाजन को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि राज्य की एकमात्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटने के दौरान जबलपुर के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया न केवल अनुचित है, बल्कि यह संवैधानिक प्रावधानों के भी विपरीत है।
संभागों के आवंटन और समानता के सिद्धांत पर सवाल
याचिका के अनुसार, पुनर्गठन के बाद जबलपुर विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में केवल 4 संभाग रखे गए हैं, जबकि उज्जैन में स्थापित किए गए नए धन्वंतरि विश्वविद्यालय को 6 संभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह विभाजन समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
यह याचिका जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे और अन्य द्वारा दायर की गई है। इसमें राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम और मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले किसी भी विशेषज्ञ समिति से व्यवहार्यता रिपोर्ट या अध्ययन नहीं करवाया।
250 करोड़ के रिजर्व फंड पर विवाद
विभाजन के साथ ही विश्वविद्यालय के वित्तीय संसाधनों के बंटवारे पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिका में उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय के पास लगभग 250 करोड़ रुपये का रिजर्व फंड मौजूद है। आरोप है कि इस राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा उज्जैन विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किया जा रहा है, जिसे लेकर याचिकाकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।
अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत को बताया कि बिना किसी ठोस आधार और विशेषज्ञ राय के इतनी बड़ी राशि का हस्तांतरण करना अनुचित है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक फंड के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
हाईकोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद अब राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि किन आधारों पर संभागों का आवंटन और फंड का विभाजन किया गया है। अदालत का यह रुख राज्य के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुए इस बड़े प्रशासनिक बदलाव के भविष्य पर असर डाल सकता है।
आगामी चार सप्ताह के भीतर सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, याचिकाकर्ताओं की मांग पर अदालत के रुख ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!