मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पतालों में घटिया दवा सप्लाई करने वाली तीन कंपनियां ब्लैकलिस्ट
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली मिर्गी की दवा गुणवत्ता जांच में अमानक पाई गई है। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHCL) ने दवा का एक बैच फेल होने पर संबंधित फर्म को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

गुणवत्ता जांच में फेल हुई मिर्गी की दवा
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHCL) ने हाल ही में तीन अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई दवाओं की गुणवत्ता में कमी और टेंडर नियमों के उल्लंघन के चलते की गई है।
मामले की गंभीरता तब सामने आई जब मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई 'लेवेतिरासेटम' (Levetiracetam) 250 mg टैबलेट का एक बैच गुणवत्ता परीक्षण में अमानक पाया गया। सरकारी औषधि परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट में बैच नंबर EV1TG004 को मानकों के विपरीत पाया गया। यह दवा मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। कॉर्पोरेशन ने कंपनी को सात दिनों के भीतर इस बैच की कुल कीमत यानी करीब 3.28 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है।
सप्लाई में लापरवाही और फर्जी दस्तावेज का मामला
दवाओं की गुणवत्ता के अलावा, सप्लाई में कोताही बरतने वाली कंपनियों पर भी गाज गिरी है। लखनऊ स्थित मेसर्स हीलर्स लैब को सरकारी अस्पतालों में 'अल्बेंडाजोल' (Albendazole) 400 mg टैबलेट की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा गया था। हालांकि, कंपनी ने अनुबंध के बावजूद पूरी मात्रा में दवा की सप्लाई नहीं की। इस लापरवाही को देखते हुए कॉर्पोरेशन ने कंपनी को दो साल के लिए डिबार कर दिया है और उनकी सुरक्षा राशि जब्त करने के आदेश दिए हैं।
तीसरी कार्रवाई इंदौर की मेसर्स डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम प्रा.लि. के खिलाफ की गई है। इस कंपनी पर निविदा प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज पेश करने का गंभीर आरोप है। कंपनी ने लैप्रोस्कोपी यूनिट की तकनीकी बिड में जो 'मैन्युफैक्चरर ऑथराइजेशन फॉर्म' (MAF) लगाया था, वह जांच में फर्जी पाया गया। निर्माता कंपनी ने इस तरह का कोई भी ऑथराइजेशन लेटर जारी करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन ने इसे टेंडर शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन अब कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। लेवेतिरासेटम जैसी दवाएं, जो मिर्गी जैसे गंभीर रोगों के प्रबंधन में उपयोग की जाती हैं, उनका अमानक होना मरीजों के लिए घातक हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी प्रयोगशाला की रिपोर्ट को ही अंतिम आधार माना जाएगा।
हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो दवाएं पहले से ही अस्पतालों में उपलब्ध हैं और गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती हैं, उन पर इस आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन भविष्य के लिए इन कंपनियों के दरवाजे फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। यह कदम उन सभी आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक चेतावनी है जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ अनुबंध का पालन करने में विफल रहते हैं।
आगे की कार्रवाई और प्रक्रिया
कॉर्पोरेशन ने संबंधित कंपनियों की सुरक्षा राशि (PBG) जब्त करने और उनके लंबित ऑनलाइन क्रय आदेशों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, वे अब आगामी दो वर्षों तक मध्य प्रदेश सरकार की किसी भी निविदा में भाग नहीं ले सकेंगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से भविष्य में दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई चेन में सुधार आएगा।
फिलहाल, विभाग उन अन्य दवाओं और उपकरणों की भी जांच कर रहा है जिनकी आपूर्ति हाल के महीनों में की गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को किसी भी स्तर पर घटिया या असुरक्षित दवा न मिले। इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी खरीद प्रक्रिया में अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!