मध्य प्रदेश चुनाव आयोग में कमीशनखोरी का मामला: तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश चुनाव आयोग में बिल पास कराने के बदले 15% कमीशन मांगे जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग में बिल भुगतान के बदले कमीशन मांगे जाने के गंभीर आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है। आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की बारीकी से पड़ताल करेगी। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य चुनावी कार्यों से जुड़ी फर्मों के भुगतान में हो रही कथित धांधली की सच्चाई सामने लाना है।
तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपी गई जिम्मेदारी
आयोग द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन करेंगे। उनके साथ उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय श्रीवास्तव और वीरेंद्र सिंह को समिति का सदस्य बनाया गया है। इन वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और तीन दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपें।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब चुनावी सेवाओं से जुड़ी फर्मों के भुगतान को लेकर अनियमितताओं के संकेत मिले। आरोप है कि लंबित बिलों को पास कराने के लिए संबंधित फर्मों से 15 प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी। इस कथित भ्रष्टाचार में बजट शाखा के कर्मचारियों, निजी दलालों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने की बात सामने आई है।
करोड़ों के बिलों के भुगतान में फंसा था पेंच
जांच के दायरे में वे फर्में हैं जिन्होंने विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और एसआईआर 2025 के दौरान अपनी सेवाएं दी थीं। इन फर्मों ने मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने, वीडियोग्राफी करने और वाहनों में जीपीएस लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए थे। काम पूरा होने के बावजूद इन फर्मों के करोड़ों रुपए के बिल महीनों से आयोग में अटके हुए थे।
कथित तौर पर, इन लंबित भुगतानों को जारी करने के बदले 15 प्रतिशत की रिश्वत मांगी जा रही थी। स्टिंग ऑपरेशन में यह दावा किया गया था कि यदि कमीशन की राशि का भुगतान कर दिया जाए, तो संबंधित फर्मों के खाते में चार से पांच दिनों के भीतर राशि पहुंच जाएगी। इस खुलासे के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
आयोग की साख पर सवाल
निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान में इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी इस जांच समिति के गठन की पुष्टि की गई है। फिलहाल, सभी की निगाहें तीन दिन बाद आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जांच समिति अब यह पता लगाएगी कि बिलों को जानबूझकर रोका गया था या नहीं और इसमें किन-किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
इस मामले ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आयोग को भुगतान प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर दलालों या बिचौलियों का हस्तक्षेप न हो सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!