मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी साइबर ठगी: 21 करोड़ की धोखाधड़ी में रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर गिरफ्तार
Madhya Pradesh biggest cyber fraud case Gwalior police investigation and arrest updates. मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी साइबर ठगी (21.05 करोड़) के मामले में ग्वालियर राज्य साइबर जोन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने रतलाम से मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

ग्वालियर साइबर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
मध्य प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी के मामले में ग्वालियर राज्य साइबर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। करीब 21.05 करोड़ रुपये की इस धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने रतलाम निवासी एक मैकेनिकल इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अंकित वर्मा के रूप में हुई है, जो इस अंतरराज्यीय गिरोह के तकनीकी पहलुओं को संभालने का काम करता था।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 'Tradecboeus' नामक एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें निवेश का झांसा दिया गया था। इस फर्जी पोर्टल पर निवेश का ग्राफ कृत्रिम रूप से ऊपर-नीचे दिखाया जाता था, जिससे निवेशकों को मुनाफा होने का भ्रम होता रहे और वे अधिक से अधिक राशि जमा करते जाएं।
ठगी का जाल और कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जी वेब पेज को विदेशी आईपी एड्रेस के जरिए नियंत्रित किया जा रहा था। जब पीड़ित ने अपने निवेश किए गए 21 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकालने का प्रयास किया, तो उनसे टैक्स के नाम पर 10 करोड़ रुपये की और मांग की गई। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने मामले की सूचना साइबर पुलिस को दी।
पुलिस की शुरुआती जांच में शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय का नाम सामने आया था। जगदीश के बैंक खाते में ठगी की रकम में से 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस ने बुधवार को जगदीश को गिरफ्तार किया, जिसके बाद पूछताछ में उसने रतलाम के अंकित वर्मा का नाम उजागर किया। अंकित ही इस गिरोह के लिए फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था।
APK फाइल और ओटीपी का खेल
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे ठगी के लिए बेहद आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। गिरोह के सदस्य मोबाइल में एक विशेष APK फाइल इंस्टॉल करवाते थे, जिससे बैंक से आने वाले सभी ओटीपी (OTP) अपने आप मुख्य हैंडलर के पास फॉरवर्ड हो जाते थे। इस तकनीक के जरिए वे पीड़ित के खातों से आसानी से पैसे उड़ा लेते थे।
यह गिरोह केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इनका नेटवर्क छह राज्यों में फैला हुआ था। जगदीश मालवीय जैसे खाता धारकों को कमीशन के लालच में फंसाकर उनके खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था। जगदीश को हर ट्रांजेक्शन पर 2 प्रतिशत का कमीशन मिलता था, जबकि अंकित वर्मा तकनीकी सहायता के बदले गिरोह से जुड़ा हुआ था।
आगे की कार्रवाई
ग्वालियर साइबर पुलिस के महानिरीक्षक शियाज ए. और पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी के दिशा-निर्देशों पर निरीक्षक मुकेश नारोलिया की टीम ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
वर्तमान में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार विदेश में बैठे किन मास्टरमाइंड्स से जुड़े हैं। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के प्रति लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
