राजस्थान के अंतिम छोर तक पहुंचा मानसून: बाड़मेर और जैसलमेर में बारिश से मिली राहत

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पश्चिमी राजस्थान में मानसून की दस्तक
राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश के बाद अब मानसून ने राज्य के सुदूर पश्चिमी छोर तक अपनी पहुंच बना ली है। प्रदेश के 30 से अधिक जिलों को तरबतर करने के बाद, मानसून की सक्रियता अब बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों तक पहुंच गई है। हालांकि, इस वर्ष मानसून का आगमन सामान्य समय से करीब 9 दिन की देरी से हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों को लंबे समय से बारिश का इंतजार था।
शनिवार को बाड़मेर और जैसलमेर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। दिनभर की भीषण उमस और गर्मी के बाद शाम के समय हुई इस बारिश ने लोगों को बड़ी राहत दी है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के इस अंतिम चरण में पहुंचने से अब पूरे प्रदेश में नमी का दायरा बढ़ गया है।
तेज आंधी और तूफानी हवाओं का असर
बाड़मेर शहर में शनिवार रात को मानसून के आगमन के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। रात करीब 9 बजे के आसपास तेज आंधी का दौर शुरू हुआ, जिसकी रफ्तार इतनी अधिक थी कि कई स्थानों पर होर्डिंग, पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए। हालांकि, आंधी का यह तीव्र प्रभाव लगभग आधे घंटे तक ही रहा, जिसके बाद हवा की गति सामान्य हो गई।
आंधी के दौरान आसमान में बिजली की चमक और मेघगर्जना का सिलसिला भी जारी रहा। जिले के चौहटन, रामसर और गिराब जैसे इलाकों से हल्की से मध्यम बारिश की खबरें मिली हैं। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से काफी हद तक राहत मिली है।
तापमान और आगामी मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रविवार को बाड़मेर का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मानसून के आगमन के बावजूद तापमान का स्तर अभी भी काफी अधिक बना हुआ है, लेकिन बारिश के दौर से इसमें क्रमिक गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले एक सप्ताह तक प्रदेश में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में तूफानी हवाओं के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है। अगले 6 से 7 दिनों तक मानसून का प्रभाव बना रहने का अनुमान है, जिससे किसानों और आम जनमानस को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मानसून की स्थिति पर नजर
राजस्थान के बड़े भू-भाग को कवर करने के बाद मानसून का पश्चिमी छोर तक पहुंचना कृषि और जल संचयन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि देरी से आए मानसून ने चिंताएं बढ़ाई थीं, लेकिन अब सक्रियता बढ़ने से स्थिति में सुधार हुआ है। प्रशासन ने भी आंधी-तूफान की संभावना को देखते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
