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गोरखपुर के एमएमएमयूटी में बनेगा 6.5 करोड़ का स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर, अंतरिक्ष विज्ञान में नई क्रांति की तैयारी

गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयनाम के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। विश्वविद्यालय का चयन भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की अंतरिक्ष प्रयोगशाला योजना के तहत किया गया है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

12 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
गोरखपुर के एमएमएमयूटी में बनेगा 6.5 करोड़ का स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर, अंतरिक्ष विज्ञान में नई क्रांति की तैयारी
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गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) में अब अंतरिक्ष अनुसंधान के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्यरत भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने विश्वविद्यालय को अपनी महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रयोगशाला योजना के लिए चुना है। इस परियोजना के तहत परिसर में एक अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना की जाएगी, जिस पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

क्लासरूम टू कॉसमॉस पहल का हिस्सा

यह पहल IN-SPACe के 'क्लासरूम टू कॉसमॉस' कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में अंतरिक्ष तकनीक के प्रति छात्रों की रुचि और कौशल को बढ़ाना है। इस केंद्र के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंतरिक्ष विज्ञान, शोध और नवाचार को एक नई गति मिलेगी। विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाली यह प्रयोगशाला न केवल छात्रों के लिए बल्कि स्टार्टअप्स और शोधार्थियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगी।

केंद्र में तीन प्रमुख एकीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें सैटेलाइट सिस्टम्स प्रयोगशाला, स्पेस रोबोटिक्स प्रयोगशाला और स्पेस एनवायरमेंट टेस्टिंग सुविधा शामिल हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थी सैटेलाइट डिजाइन, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष में उपयोग होने वाले उपकरणों के परीक्षण का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की विशेषताएं

सैटेलाइट सिस्टम्स प्रयोगशाला में क्यूबसैट और छोटे उपग्रहों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां छात्र उपग्रह संचार, ग्राउंड स्टेशन संचालन और अंतरिक्ष प्रणाली के सिमुलेशन जैसे जटिल कार्यों को समझ सकेंगे। वहीं, स्पेस रोबोटिक्स लैब में ऐसे स्वायत्त रोबोट और ग्रहीय रोवर विकसित करने पर शोध होगा, जो अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में काम करने में सक्षम हों।

स्पेस एनवायरमेंट टेस्टिंग सुविधा इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां थर्मल-वैक्यूम टेस्ट, कंपन परीक्षण और विद्युत-चुंबकीय संगतता जैसे परीक्षण किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरण प्रक्षेपण के दौरान होने वाले कंपन और अत्यधिक तापमान जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी सुरक्षित और क्रियाशील बने रहें।

विशेषज्ञों की देखरेख में होगा कार्य

इस महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार वर्मा कर रहे हैं, जो प्रधान अन्वेषक (PI) के रूप में कार्यभार संभालेंगे। डॉ. वर्मा को इसरो के यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर में कार्य करने का लंबा अनुभव है। उनके साथ सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऑडिथन सिवरामन सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में रिमोट सेंसिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अपना तकनीकी मार्गदर्शन देंगे।

यह केंद्र केवल एमएमएमयूटी के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्रीय संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए भी एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे इंजीनियरिंग के छात्रों को किसी अंतरिक्ष परियोजना के शुरुआती कॉन्सेप्ट से लेकर प्रोटोटाइप निर्माण और अंतिम परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखने और सीखने का मौका मिलेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि का श्रेय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा के मार्गदर्शन को दिया है। इस केंद्र की स्थापना से गोरखपुर की पहचान अब तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है। यह पहल निश्चित रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए करियर के नए अवसर पैदा करेगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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