मेरठ: सपा नेताओं से मारपीट मामले में नए एसएसपी का सख्त कदम, सिविल लाइंस थाने का पूरा स्टाफ लाइन हाजिर
मेरठ के नए कप्तान बीबीजीटीएस मूर्ति ने चार्ज संभालते ही बड़ा एक्शन लिया है। सिविल लाइन थाने पर तैनात 8 लोगों को लाइन हाजिर किया गया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

पदभार संभालते ही एक्शन मोड में नए कप्तान
मेरठ में पुलिस प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया जब नवनियुक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बीबीजीटीएस मूर्ति ने अपना कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया। शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के बाद, एसएसपी ने देर रात सिविल लाइंस थाने के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर करने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई की चपेट में थाना प्रभारी समेत कुल आठ पुलिसकर्मी आए हैं।
इस अचानक हुई कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ हुई कथित मारपीट का मामला बताया जा रहा है। हाल ही में सपा नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद से ही स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे और मामला सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहा।
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की कवायद
एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। वर्तमान में इस मामले की विस्तृत जांच सहारनपुर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अभिषेक सिंह द्वारा की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि सिविल लाइंस थाने का पुराना स्टाफ अपने पदों पर बना रहता, तो जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।
वायरल हुए एक वीडियो में सपा नेता दिग्विजय भाटी ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ पर सीधे तौर पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष ने भी पुलिस प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया था, जिसके बाद से पुलिस विभाग पर कार्रवाई का भारी दबाव था।
लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों की सूची
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी सूची में थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार गौड़ के अलावा उप-निरीक्षक मुलायम सिंह, हेड कांस्टेबल हरिओम, कांस्टेबल मुकेश कुमार, हेड कांस्टेबल श्याम बाबू, कांस्टेबल सुमित कुमार, महिला कांस्टेबल नीलम लौर और चालक ललित कुमार शामिल हैं। इन सभी को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस विभाग में एक कड़ा संदेश देने के रूप में देखी जा रही है। नए कप्तान के इस फैसले से यह स्पष्ट है कि विभाग अब किसी भी विवादित मामले में लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन के निर्देशों के अनुपालन में यह जांच की जा रही है, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
आगे की राह और जांच का दायरा
फिलहाल, लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों की जगह नए अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है ताकि थाने का कामकाज प्रभावित न हो। डीआईजी सहारनपुर की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मेरठ के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस और जन प्रतिनिधियों के बीच के संबंधों और कानून-व्यवस्था के पालन के तरीकों पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें डीआईजी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि सपा नेताओं के आरोपों में कितनी सच्चाई है और पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही थी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!