ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने 20 दिन बाद तोड़ा अनशन, सरकार को दिया तीन महीने का अल्टीमेटम

मराठा एक्टिवस्ट मनोज जरांगे ने अपनी 20 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगों पर विचार करने और कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय दिया है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

17 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने 20 दिन बाद तोड़ा अनशन, सरकार को दिया तीन महीने का अल्टीमेटम
मूल स्रोत

20 दिनों से जारी संघर्ष पर लगा विराम

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने आखिरकार अपना 20 दिन पुराना अनशन समाप्त कर दिया है। जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने और आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई थी।

जरांगे का यह आंदोलन 29 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी से शुरू हुआ था। उनकी मुख्य मांग मराठा समुदाय को कुणबी वंशावली के आधार पर ओबीसी कोटे के अंतर्गत आरक्षण प्रदान करना है। अपनी मांगों को लेकर वे 15 सितंबर को मुंबई की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अपना मार्च रोकना पड़ा।

स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चुनौतियां

बीड के पाटोदा में रुकने के दौरान डॉक्टरों ने जरांगे की स्वास्थ्य जांच की, जिसमें उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी कम पाया गया। लंबे समय तक अन्न-जल त्यागने के कारण वे गंभीर डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहे थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उन्हें तत्काल उपचार की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने अनशन वापस लेने का निर्णय लिया।

दूसरी ओर, मुंबई में प्रदर्शन को लेकर भी कानूनी पेच फंस गए थे। जरांगे ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन गणेश उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए मुंबई पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की संख्या और वाहनों के विवरण को लेकर भी स्पष्टता मांगी थी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई थी।

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद

महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने जरांगे से अपील की थी कि वे अपना आंदोलन समाप्त करें और बातचीत का रास्ता अपनाएं। सरकार का कहना है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान चर्चा के माध्यम से निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की 13 में से 12 कानूनी रूप से वैध मांगों पर पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह पहली बार नहीं है जब जरांगे ने आरक्षण के लिए सरकार के साथ बातचीत की है। पिछले वर्ष सितंबर में भी सरकार ने उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार किया था, जिसके बाद कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब तीन महीने का यह नया समय सीमा मराठा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले तीन महीनों में सरकार किस प्रकार से कुणबी वंशावली और आरक्षण के कानूनी पहलुओं को सुलझाती है। मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे भविष्य में फिर से कड़ा रुख अपना सकते हैं। फिलहाल, प्रशासन ने राहत की सांस ली है और अब बातचीत के अगले दौर की तैयारी की जा रही है।

राज्य में मराठा आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र रहा है। इस आंदोलन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में तनाव की स्थिति बनी रहती है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह ओबीसी वर्ग के हितों को प्रभावित किए बिना मराठा समुदाय की मांगों को किस प्रकार कानूनी ढांचे में फिट करती है।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें