अमरावती में आदमखोर बाघिन 'पिंकी' की रेस्क्यू के दौरान मौत, चार लोगों की ली थी जान
बैतूल से सटे महाराष्ट्र के अमरावती जिले में चार लोगों का शिकार करने वाली बाघिन पिंकी की मौत हो गई। उसे पकड़ने के लिए शिरजगांव कसबा क्षेत्र में चलाए गए बचाव अभियान के दौरान डार्ट मारकर बेहोश किया गया था।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हुई मौत
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में आतंक का पर्याय बनी 'पिंकी' नामक बाघिन की मौत हो गई है। यह बाघिन पिछले कुछ समय से लगातार इंसानों पर हमले कर रही थी, जिसके चलते उसे पकड़ने के लिए वन विभाग द्वारा एक विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। शिरजगांव कसबा क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने बाघिन को ट्रेंकुलाइजर डार्ट मारकर बेहोश किया था, लेकिन बेहोश होने के बाद वह दोबारा होश में नहीं आ सकी।
इस बाघिन ने चार लोगों को अपना शिकार बनाया था, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल था। बाघिन की मौत के बाद अब वन विभाग के अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बेहोश करने के बाद उसकी स्थिति अचानक क्यों बिगड़ी और मौत का सटीक कारण क्या रहा।
चार लोगों की जान लेकर मचाया था कोहराम
पिंकी बाघिन के हमलों में जान गंवाने वालों में आष्टी के किसान राजाभाऊ भोयर, भांबोरा निवासी चरणदास विखे, सोनौरी की 22 वर्षीय उर्मिला बाजीराव इवने और शिरजगांव कसबा के किसान दामू भाऊ आवारे शामिल थे। इन लगातार हमलों ने ग्रामीणों के बीच इतना खौफ पैदा कर दिया था कि लोग अकेले खेतों में जाने से कतराने लगे थे। मवेशी चराने वाले ग्रामीण भी अब समूह में ही जंगल की ओर जाने को मजबूर थे।
ग्रामीणों के अनुसार, बाघिन ने न केवल इंसानों पर हमला किया था, बल्कि कई मवेशियों को भी अपना निवाला बनाया था। दामू भाऊ आवारे पर हुए अंतिम हमले के बाद वन विभाग ने इस बाघिन को पकड़ने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी और कई टीमों को जंगल में तैनात किया गया था।
बैतूल तक फैली थी दहशत
अमरावती का यह इलाका मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की सीमा से सटा हुआ है। महाराष्ट्र के जंगलों में बाघों की आवाजाही अक्सर बैतूल के सीमावर्ती क्षेत्रों तक देखी जाती है। ऐसे में अमरावती में बाघिन द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों ने बैतूल के ग्रामीणों की चिंताएं भी बढ़ा दी थीं। स्थानीय लोगों को डर था कि कहीं यह बाघिन भटककर उनके इलाकों में न आ जाए।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुणे के रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. हेमराज और उनकी टीम ने बाघिन की घेराबंदी की थी। जैसे ही बाघिन की लोकेशन मिली, उसे डार्ट मारकर बेहोश करने का प्रयास सफल रहा, लेकिन यह प्रक्रिया बाघिन के लिए घातक साबित हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
बाघिन की मौत के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा का विषय है कि रेस्क्यू के दौरान प्रोटोकॉल का पालन करने के बावजूद बाघिन की जान क्यों गई। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर जंगल और आबादी के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर कर दिया है। हालांकि आदमखोर बाघिन का अंत हो गया है, लेकिन वन विभाग के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि भविष्य में वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में प्रवेश को कैसे रोका जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!