सर्किट हाउस विवाद: महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष से की तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
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मोहम्मद नवेद
एडिटर

सर्किट हाउस से बेदखली पर भड़कीं सांसद
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने नदिया जिले के सर्किट हाउस में हुई घटना को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक विशेषाधिकार नोटिस सौंपा है। सांसद ने आरोप लगाया है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, बल्कि उन्हें उनके संसदीय कार्यों को पूरा करने से रोकने का प्रयास भी किया।
मोइत्रा ने अपनी शिकायत में नदिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पाली, अपर जिलाधिकारी निरपेंद्र सिंह और नाजरेथ डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा को नामजद किया है। सांसद का कहना है कि इन अधिकारियों ने जानबूझकर उन्हें परेशान करने की मंशा से यह कदम उठाया, जो एक जनप्रतिनिधि के अधिकारों का सीधा हनन है।
क्या है पूरा मामला?
सांसद के अनुसार, यह घटना 14 अगस्त की रात की है। उन्होंने बताया कि उनकी सर्किट हाउस बुकिंग पहले से ही कन्फर्म थी। हालांकि, रात करीब 9:47 बजे उन्हें अचानक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया। मोइत्रा ने तर्क दिया कि रखरखाव के लिए जो आदेश 12 अगस्त को जारी किया गया था, उसका हवाला देकर उन्हें देर रात बाहर निकालने की कोशिश करना पूरी तरह से अनुचित था।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए ताकि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके। उन्होंने भविष्य में अपने संसदीय क्षेत्र के दौरों के दौरान सांसदों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।
प्रशासनिक लापरवाही और विशेषाधिकार का मुद्दा
संसदीय नियमों के तहत, एक सांसद को अपने क्षेत्र में आधिकारिक दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के अनुसार सुविधाएं और सुरक्षा प्राप्त होती है। महुआ मोइत्रा का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने इन नियमों की अनदेखी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि देर रात एक महिला सांसद को आवास से बाहर जाने के लिए मजबूर करना न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा और गरिमा के साथ भी खिलवाड़ है।
लोकसभा अध्यक्ष को दी गई शिकायत में मोइत्रा ने यह भी रेखांकित किया है कि कैसे प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए एक निर्वाचित प्रतिनिधि के काम में बाधा डाली। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
आगे की कार्रवाई की उम्मीद
अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय पर टिकी हैं कि वे इस विशेषाधिकार नोटिस पर क्या निर्णय लेते हैं। विशेषाधिकार समिति के पास मामला जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया जा सकता है। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां विपक्ष इसे सत्ताधारी दल के इशारे पर प्रशासनिक दमन के रूप में देख रहा है।
सांसद महुआ मोइत्रा ने दोहराया है कि वे इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि भविष्य में किसी भी अन्य जनप्रतिनिधि को इस तरह की अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!