मध्य प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या में भारी गिरावट, सरकार ने विधानसभा में पेश किए आंकड़े
Madhya Pradesh unemployment statistics report Mohan Yadav government employment portal data update. मध्यप्रदेश में छह माह में 8 लाख 24 हजार 548 बेरोजगार युवा घट गए हैं और अब 30 जून 2026 की स्थिति में प्रदेश में आकांक्षी युवाओं (बेरोजगार युवा) की संख्या 17 लाख 71 हजार 132 रह गई है। यह दावा मोहन यादव सरकार ने विधानसभा के एक सवाल के लिखित जवाब में दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

छह महीने में बेरोजगारों की संख्या में आठ लाख से अधिक की कमी
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में बेरोजगारी की स्थिति को लेकर विधानसभा में ताजा आंकड़े पेश किए हैं। कौशल विकास और रोजगार विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या में पिछले छह महीनों के भीतर उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 30 जून 2026 की स्थिति के अनुसार, प्रदेश में आकांक्षी युवाओं की कुल संख्या 17 लाख 71 हजार 132 रह गई है।
सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक रोजगार पोर्टल पर दर्ज बेरोजगार युवाओं की संख्या 25 लाख 95 हजार 680 थी। इस प्रकार, महज छह माह के अंतराल में बेरोजगारों की संख्या में 8 लाख 24 हजार 548 की कमी आई है। इस भारी गिरावट ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
विधानसभा में विधायक के सवाल पर सरकार का जवाब
यह जानकारी कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई। विधायक ने सरकार से राज्य में रोजगार सृजन की योजनाओं, निजी क्षेत्र में नौकरियों की स्थिति और रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को मिले स्थायी रोजगार का ब्योरा मांगा था। उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि सरकार के उच्च अधिकारियों द्वारा रोजगार को लेकर बनाई गई नीतियों का पिछले पांच वर्षों में क्या परिणाम रहा है।
कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन को बताया कि सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर जॉब फेयर का आयोजन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय बैठकों में लिए गए निर्णयों के आधार पर ही रोजगार संबंधी कार्यवाहियां की जा रही हैं। हालांकि, आंकड़ों में आए इस बड़े अंतर पर विपक्ष ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
आंकड़ों में विरोधाभास और जिलों की स्थिति
राज्य सरकार के इन आंकड़ों पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि फरवरी 2026 में बजट सत्र के दौरान भी मंत्री गौतम टेटवाल ने ही दिसंबर 2025 के आंकड़े पेश किए थे, जो अब दिए गए आंकड़ों से काफी अधिक थे। महज कुछ महीनों के भीतर बेरोजगारों की संख्या में आई इतनी बड़ी कमी के कारणों को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रीवा जिला बेरोजगारी के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है, जहां सबसे अधिक बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं। इसके विपरीत, पांढुर्णा जिले में बेरोजगारी का आंकड़ा सबसे कम दर्ज किया गया है। सरकार का दावा है कि पोर्टल पर दर्ज ये आंकड़े आकांक्षी युवाओं की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हैं।
रोजगार योजनाओं पर सरकार का रुख
सरकार ने अपने जवाब में यह दोहराया है कि राज्य में हर हाथ को काम देने के लिए विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। निजी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, विधानसभा में पेश किए गए इन आंकड़ों के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह कमी वास्तव में रोजगार मिलने के कारण है या पोर्टल से पंजीकरण हटने या अन्य तकनीकी कारणों से हुई है।
आने वाले दिनों में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह बेरोजगारों की संख्या में आई इस कमी का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनमें से कितने युवाओं को वास्तव में स्थायी रोजगार प्राप्त हुआ है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
