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मध्य प्रदेश में 50 लाख लोगों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक, 17 सितंबर से शुरू होगी मुफ्त रजिस्ट्री

प्रदेश में आबादी की जमीन पर काबिज स्वामित्व योजना के 50 लाख हितग्राहियों की जमीन और आवास की मुफ्त में रजिस्ट्री करने राज्य शासन ने राजस्व निरीक्षकों, पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को सब रजिस्ट्रार के पॉवर दिए हैं। मोहन सरकार पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से प्रदेश के स्वामित्व योजना के हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री करके जमीन के मालिकाना हक के अधिकार देने जा रही

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

14 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश में 50 लाख लोगों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक, 17 सितंबर से शुरू होगी मुफ्त रजिस्ट्री
मूल स्रोत

स्वामित्व योजना के तहत बड़े अभियान की तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में आबादी भूमि पर काबिज 50 लाख से अधिक हितग्राहियों को उनकी जमीन और आवास का कानूनी मालिकाना हक देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से प्रदेशव्यापी मुफ्त रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों को उनकी संपत्ति का वैध दस्तावेज प्रदान करना है।

इस अभियान को गति देने के लिए राज्य शासन ने प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब राजस्व निरीक्षकों (RI), पंचायत समन्वय अधिकारियों और सहायक विकास विस्तार अधिकारियों को सब-रजिस्ट्रार के विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन अधिकारियों को उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र में रजिस्ट्री करने के लिए अधिकृत किया गया है, ताकि हितग्राहियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

अधिकारियों के लिए तय किया गया दैनिक लक्ष्य

रजिस्ट्री की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं। राजस्व विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, प्रत्येक अधिकृत अधिकारी को प्रतिदिन कम से कम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित हल्का पटवारी का नाम रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में दर्ज किया जाएगा, जिससे जमीन के रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन आसान हो सके।

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत, राजस्व निरीक्षकों को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के अंतर्गत शक्तियां दी गई हैं। ये अधिकारी अपने संबंधित जिलों में आबादी भूमि की रजिस्ट्री करने के लिए सक्षम होंगे। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को उनके जनपद क्षेत्र के भीतर उप-पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर काम में तेजी आएगी।

प्रशासनिक तैयारी और पटवारियों की चिंताएं

उल्लेखनीय है कि इस योजना को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इससे पूर्व सरकार ने प्रदेश के सभी तहसीलदारों को भी सब-रजिस्ट्रार के अधिकार दिए थे, ताकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अब नए अधिकारियों के जुड़ने से रजिस्ट्री करने वाले तंत्र का दायरा काफी बढ़ गया है, जिससे 50 लाख हितग्राहियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर पटवारियों के बीच विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं। पटवारी संघ का कहना है कि रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में उनका नाम दर्ज होने से भविष्य में कानूनी विवादों की स्थिति में उन पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि यदि रजिस्ट्री से जुड़ा कोई कानूनी मामला सामने आता है, तो उनके बचाव के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव है, जिससे वे कानूनी पेचीदगियों में फंस सकते हैं।

योजना का भविष्य और प्रभाव

स्वामित्व योजना के माध्यम से सरकार ग्रामीण आबादी को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। मालिकाना हक मिलने से न केवल लोगों को अपनी संपत्ति पर सुरक्षा का अहसास होगा, बल्कि वे बैंक से ऋण लेने और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अपनी जमीन का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र हितग्राहियों को उनके दस्तावेज सौंप दिए जाएं।

आगामी 17 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान प्रदेश के राजस्व इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। प्रशासन अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि कैसे तकनीकी और प्रशासनिक तालमेल बिठाकर इस बड़े लक्ष्य को हासिल किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ रजिस्ट्री प्रक्रिया को संपन्न करें ताकि किसी भी हितग्राही को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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