मध्य प्रदेश में खाद का संकट: यूरिया भरपूर, फिर भी डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसान
Madhya Pradesh fertilizer shortage DAP urea supply issues farmer queue latest news updates. बोवनी के हर सीजन में खाद वितरण केन्द्रों पर किसानों की कतारें नजर आतीं हैं। सरकार की ओर से यह कहा जाता है कि खाद की कोई कमी नहीं हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
मध्य प्रदेश में हर बार बुवाई के सीजन के दौरान खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें एक आम दृश्य बन गई हैं। सरकार का दावा है कि राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सोसायटियों पर किसानों की भीड़ और हंगामे की खबरें सरकारी दावों पर सवालिया निशान लगाती हैं। संसद में पेश किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 के लिए मध्य प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता मांग से कहीं अधिक रही है, फिर भी डीएपी की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश को करीब 9.61 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी। इसके मुकाबले केंद्र सरकार ने मांग से 147 फीसदी अधिक यानी 14.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की है। यूरिया का इतना बड़ा सरप्लस स्टॉक होने के बावजूद, राज्य में खाद के लिए हाहाकार मचने का मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर वितरण प्रबंधन की खामियां मानी जा रही हैं।
डीएपी की कमी बनी बड़ी मुसीबत
यूरिया के विपरीत, डीएपी (DAP) की आपूर्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य में डीएपी की मांग 3.57 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि आपूर्ति केवल 3.05 लाख मीट्रिक टन ही हो सकी। इस प्रकार, ऐन बुवाई के समय किसानों को 52 हजार मीट्रिक टन डीएपी कम मिला। दूसरी ओर, एनपीकेएस (NPKS) खाद की उपलब्धता मांग से काफी अधिक रही है। एनपीकेएस की मांग 4.21 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि राज्य में 6.67 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएपी की कमी के कारण ही सोसायटियों पर धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय एनपीकेएस जैसे संतुलित उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है, जो कि सरप्लस मात्रा में उपलब्ध हैं।
वितरण तंत्र और केंद्र-राज्य की जिम्मेदारी
खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एक बहुस्तरीय व्यवस्था का पालन करती है। फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकार के साथ मिलकर माह-वार आवश्यकता का निर्धारण करता है। केंद्र का मुख्य कार्य रेलवे रैक के माध्यम से राज्य की सीमा तक खाद पहुंचाना है, जबकि राज्य के भीतर जिला, ब्लॉक और सोसायटियों तक खाद का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।
उर्वरक प्रबंधन के लिए एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) का उपयोग किया जाता है और साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वास्तविक समय में आ रही दिक्कतों को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। बावजूद इसके, यूरिया का सरप्लस स्टॉक होने के बाद भी सोसायटियों पर लाइनें लगना स्थानीय प्रशासनिक तंत्र के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
मध्य प्रदेश न केवल खाद का उपभोक्ता है, बल्कि यूरिया उत्पादन में भी एक प्रमुख राज्य है। वर्ष 2022-23 में राज्य ने 22.37 लाख मीट्रिक टन का उच्चतम उत्पादन दर्ज किया था। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी जून तक 5.40 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हो चुका है। देश भर में यूरिया आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी समेत कई नए प्लांट शुरू किए हैं, जिससे देश की कुल उत्पादन क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।
आने वाले समय में तालचेर में कोयला गैसीकरण आधारित संयंत्र और नामरूप में नए परिसर के निर्माण से उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार ने यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी है, ताकि भविष्य में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों को किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
